काशीपुर। उत्तराखंड सरकार भले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा करती हो, लेकिन राज्य में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की बढ़ती संख्या अलग तस्वीर पेश कर रही है।
सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड की विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
वर्ष 2023 की शुरुआत में जहां ऐसे 368 मामले लंबित थे, वहीं वर्ष 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत तक यह संख्या बढ़कर 506 पहुंच गई है।
RTI से हुआ बड़ा खुलासा
यह जानकारी काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को उत्तराखंड हाईकोर्ट के लोक सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई गई है। नदीम उद्दीन ने उत्तराखंड के विशेष भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालयों में लंबित और निस्तारित मामलों का पूरा विवरण मांगा था।
हाईकोर्ट के राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं संयुक्त रजिस्ट्रार एच.एस. जीना द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना में वर्ष 2023, 2024 और 2025 के आंकड़ों का विवरण शामिल है।
तीन विशेष अदालतों में 506 मामले लंबित
31 दिसंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड की तीन विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालतों में कुल 506 मामले लंबित हैं। इनमें—
- स्पेशल जज (सीबीआई), देहरादून – 64 मामले
- स्पेशल जज (विजिलेंस), देहरादून – 248 मामले
- स्पेशल जज (एंटी करप्शन), हल्द्वानी – 194 मामले
तीन वर्षों में लगातार बढ़ा लंबित मामलों का आंकड़ा
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्षवार स्थिति इस प्रकार रही—
| वर्ष | नए मामले | निस्तारित मामले | लंबित मामले |
|---|---|---|---|
| 2023 की शुरुआत | — | — | 368 |
| 2023 के अंत | 98 | 33 | 433 |
| 2024 के अंत | 79 | 32 | 480 |
| 2025 के अंत | 48 | 22 | 506 |
आंकड़ों से स्पष्ट है कि नए मामलों की तुलना में निस्तारण की गति काफी धीमी रही, जिसके कारण लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता गया।
हाईकोर्ट में भी सैकड़ों मामले लंबित
आरटीआई के अनुसार उत्तराखंड हाईकोर्ट में भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की बड़ी संख्या लंबित है।
- 2023 की शुरुआत: 226 मामले
- 2023 के अंत: 249 मामले
- 2024 के अंत: 294 मामले
- 2025 के अंत/2026 की शुरुआत: 290 मामले
इनमें प्रमुख रूप से अपील, रिवीजन, विभिन्न धाराओं के तहत विविध प्रार्थना पत्र और जमानत याचिकाएं शामिल हैं।
कौन-कौन से मामले हैं शामिल?
हाईकोर्ट में लंबित मामलों में शामिल हैं—
- 201 अपील
- 23 रिवीजन याचिकाएं
- 34 विविध प्रार्थना पत्र (धारा 482)
- 29 विविध प्रार्थना पत्र (धारा 528)
- 3 जमानत प्रार्थना पत्र
विशेषज्ञों की नजर में बढ़ती चुनौती
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार के मामलों का समयबद्ध निस्तारण न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए आवश्यक है। लंबित मामलों की लगातार बढ़ती संख्या न्यायिक प्रक्रिया की गति और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।
हालांकि, इन आंकड़ों से केवल लंबित मामलों की संख्या सामने आती है। किसी भी मामले में दोष सिद्ध होना या आरोपी का दोषी होना न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करता है।






