जेनी बोलीं- मेरे नाम पर राजनीति बंद करें, सच्चाई मैं खुद बताऊंगी
सामने आए वीडियो में महिला ने कहा कि वर्ष 2003 में उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था, इसकी जानकारी केवल उन्हें है। उनके पास इस मामले से जुड़े सबूत भी मौजूद हैं। उन्होंने उत्तराखंड के नेताओं से अपील की कि वे एक-दूसरे पर आरोप लगाने और उनके नाम का इस्तेमाल कर राजनीतिक बयानबाजी करने से बचें।
महिला ने कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए। वह उचित समय पर सार्वजनिक रूप से सामने आकर पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखेंगी। उनके इस बयान के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर वह किन तथ्यों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करने वाली हैं।
2003 का जेनी प्रकरण क्या है?
जेनी प्रकरण वर्ष 2003 का है। उस समय उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री थे। इसी दौरान असम मूल की एक महिला ने नौकरी दिलाने के नाम पर शारीरिक शोषण किए जाने और बच्चे के पितृत्व को लेकर आरोप लगाए थे।
मामले ने उस समय प्रदेश की राजनीति में काफी हलचल पैदा की थी। बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई। हरक सिंह रावत ने अपनी सफाई में दावा किया कि सीबीआई और डीएनए जांच में वह पाक-साफ साबित हुए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने तत्कालीन मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।
सीएम धामी के बयान के बाद फिर गरमाया मामला
करीब 23 साल पुराने इस प्रकरण ने एक बार फिर 24 अक्टूबर को राजनीतिक तूल पकड़ा, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में इसका जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा था। मुख्यमंत्री के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।
इसके बाद हरक सिंह रावत ने भी पलटवार करते हुए पुराने मामले को दोबारा उठाए जाने पर सवाल खड़े किए। इस तरह लंबे समय से चर्चा से बाहर रहा जेनी प्रकरण फिर उत्तराखंड की सियासत के केंद्र में आ गया।
इस विवाद में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी सवाल उठाया था कि जेनी के बच्चे के पिता की पहचान सार्वजनिक क्यों नहीं हुई। इस पर हरक सिंह रावत ने जवाब देते हुए कहा कि उनका डीएनए टेस्ट हो चुका है और महेंद्र भट्ट का भी डीएनए टेस्ट होना चाहिए।
हरक सिंह रावत के इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई। दोनों पक्षों की ओर से इस पुराने प्रकरण को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
भाजपा ने कहा- अब जेनी के सवालों का सामना करने की बारी
जेनी के कथित बयान के बाद भाजपा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। भाजपा की ओर से विपक्ष और अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर लगातार सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा गया कि अंकिता के नाम पर राजनीति करने वालों को अब जेनी के सवालों का भी सामना करना चाहिए।
भाजपा ने महिला के बयान को अहम बताते हुए कहा कि यदि उनके पास सबूत हैं तो उन्हें सामने आकर पूरे मामले की सच्चाई रखनी चाहिए। पार्टी की इस प्रतिक्रिया के बाद जेनी प्रकरण को लेकर सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं।
अब किस राज से पर्दा उठाएंगी जेनी? राजनीतिक गलियारों में हलचल
फिलहाल खुद को जेनी बताने वाली महिला ने सबूतों के साथ सामने आने का दावा किया है, लेकिन उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किन लोगों या किन घटनाओं से जुड़े तथ्य सार्वजनिक करेंगी। उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी बाकी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि महिला कब सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखती हैं और उनके पास मौजूद बताए जा रहे सबूतों में क्या सामने आता है। क्या उनके बयान से 23 साल पुराने मामले को लेकर उठ रहे सवालों को नया जवाब मिलेगा या उत्तराखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का एक और दौर शुरू होगा? फिलहाल जेनी प्रकरण ने प्रदेश की सियासत में फिर हलचल मचा दी है।






