सड़क नहीं, डांडी बनी सहारा: गर्भवती को छह किमी पैदल ले गए ग्रामीण,अस्पताल पहुंचे तो बाहर ये लिखा था!

रिपोर्ट /गिरीश चंदोला पथरीले रास्ते, खड़ी पहाड़ियां और गहरी खाई के बीच कुर्सी पर बैठाकर छः किमी का सफर; खराब मौसम के कारण आधे रास्ते से लौटा हेलीकॉप्टर देवाल अस्पताल पहुंचे तो बाहर लिखा था- ‘डॉक्टर पेपर देने गए हुए हैं’, रेफर के बाद एंबुलेंस के लिए भी दो घंटे इंतजार चमोली / देवाल। पथरीले […]

रिपोर्ट /गिरीश चंदोला

  • पथरीले रास्ते, खड़ी पहाड़ियां और गहरी खाई के बीच कुर्सी पर बैठाकर छः किमी का सफर; खराब मौसम के कारण आधे रास्ते से लौटा हेलीकॉप्टर
  • देवाल अस्पताल पहुंचे तो बाहर लिखा था- ‘डॉक्टर पेपर देने गए हुए हैं’, रेफर के बाद एंबुलेंस के लिए भी दो घंटे इंतजार

चमोली / देवाल। पथरीले रास्ते, खड़ी पहाड़ियां और गहरी खाई। सड़क सुविधा से वंचित पिनाऊं गाँव की प्रसूता महिला खिमली देवी पत्नी धन सिंह उम्र 33 की तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों को उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए छह किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। महिला को पहले डंडी और फिर कुर्सी के सहारे दुर्गम रास्ते से सड़क तक पहुंचाया गया।

इस दौरान हेली सेवा की भी कोशिश की गई, लेकिन खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण हेलीकॉप्टर आधे रास्ते से ही लौट गया। इसके बाद ग्रामीण महिला को वाहनों के जरिए देर रात देवाल अस्पताल लेकर पहुंचे। पिनाऊं पूर्व विधायक स्वर्गीय शेर सिंह दानू का गांव है, लेकिन यहां अब तक सड़क सुविधा नहीं पहुंच पाई है। सड़क नहीं होने का खामियाजा ग्रामीणों को मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के दौरान उठाना पड़ता है।

दोपहर से शाम तक हेलीकॉप्टर का इंतजार

ग्रामीणों के अनुसार महिला की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीण जुटे। सड़क नहीं होने के कारण महिला को डंडी में बैठाकर पैदल रास्ते से ले जाया गया। रास्ता खराब होने और कई जगह अवरोध होने से ग्रामीणों को परेशानी हुई।

ग्राम प्रधान लखपत दानू ने मामले की जानकारी थराली विधायक भूपाल राम टम्टा को दी। महिला की स्थिति को देखते हुए विधायक की ओर से हेली सेवा की व्यवस्था कराने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, दोपहर करीब दो बजे महिला को लेकर वे बलाण गांव में हेलीकॉप्टर के लिए निर्धारित स्थान पर पहुंच गए थे।

काफी देर इंतजार किया लेकिन क्षेत्र में कम विजिबिलिटी के कारण हेली आधे रास्ते से ही वापस लौट गया। ग्राम प्रधान के अनुसार शाम करीब साढ़े पांच बजे तक इंतजार किया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने महिला को सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया।

छः किमी कुर्सी पर बैठाकर ले गए

ग्रामीणों ने महिला को करीब छः किलोमीटर तक कुर्सी पर बैठाकर पैदल पहुंचाया। इसके बाद सड़क तक पहुंचने पर अलग-अलग वाहनों की मदद से महिला को देर रात देवाल चिकित्सालय ले जाया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर वहां डॉक्टर मौजूद नहीं थे। अस्पताल के बाहर एक बोर्ड लगा था, जिस पर लिखा था- ‘डॉक्टर पेपर देने गए हुए हैं।’ ग्रामीणों का कहना है कि महिला की स्थिति की जानकारी पहले ही फोन से एएनएम को दी गई थी। दोबारा सूचना देने के बाद एएनएम अस्पताल पहुंचीं।

महिला को आगे रेफर किए जाने के बाद एंबुलेंस के लिए भी दो घंटे से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा। ग्रामीणों के मुताबिक इसके बाद महिला को आगे उपचार के लिए ले जाया गया और सुबह करीब चार बजे बागेश्वर अस्पताल पहुंचाया गया।

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विधायक बोले- कम विजिबिलिटी के कारण लौटा हेलीकॉप्टर

थराली विधायक भूपाल राम टम्टा ने बताया कि गर्भवती महिला और जच्चा-बच्चे की स्थिति को देखते हुए तत्काल हेली सेवा की व्यवस्था कराने का प्रयास किया गया था। क्षेत्र में विजिबिलिटी कम होने के कारण हेलीकॉप्टर आधे रास्ते से वापस लौट गया। इसके बाद ग्रामीणों ने महिला को डंडी के माध्यम से अस्पताल तक पहुंचाया।

ग्रामीणों का सवाल- कब खत्म होगा सड़क का इंतजार?

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा नहीं होने के कारण क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को आज भी डांडी, कुर्सी या पैदल रास्ते के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। उनका कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। ग्रामीणों ने गांव तक सड़क पहुंचाने के साथ अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सकों और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर योजनाएं और दावे किए जाते हैं, लेकिन दुर्गम गांवों में मरीज को अस्पताल पहुंचाना आज भी चुनौती बना हुआ है।

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