देहरादून। उत्तराखंड में मानसून का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 20 जुलाई के लिए राज्य के कई हिस्सों में रेड अलर्ट और 21 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने भारी से अत्यंत भारी बारिश, जलभराव, भूस्खलन, आकाशीय बिजली और नदी-नालों के जलस्तर में तेज बढ़ोतरी की आशंका जताई है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह हाई अलर्ट पर है और सभी विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
आज रेड अलर्ट, कल भी रहेगा मौसम का खतरा
मौसम विभाग के अनुसार,सोमवार को कई जिलों में मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। वहीं मंगलवार को भी ऑरेंज अलर्ट लागू रहेगा। लगातार हो रही बारिश के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और मैदानी इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका है।
जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद रहकर हालात पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से ही राहत एवं बचाव की तैयारियां पूरी करने को कहा गया है।
निर्देशों के अनुसार—
- भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जेसीबी मशीनें पहले से तैनात रहें।
- राहत एवं बचाव उपकरण हर समय उपलब्ध रहें।
- पर्याप्त मानव संसाधन और आपदा प्रबंधन दल अलर्ट मोड में रहें।
- सड़क बाधित होने की स्थिति में तत्काल मार्ग खोलने की कार्रवाई की जाए।
- किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत कार्य शुरू किए जाएं।
DEOC को तुरंत दें हर घटना की सूचना
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की आपदा, दुर्घटना या अप्रिय घटना की सूचना बिना देरी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) को उपलब्ध कराई जाए। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखें ताकि जन-धन के नुकसान को कम किया जा सके।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।
विशेष रूप से लोगों से कहा गया है कि—
- नदी, नालों और बरसाती गदेरों के आसपास न जाएं।
- भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जाने से बचें।
- खराब मौसम में पर्वतीय यात्रा टालें।
- प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
- किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना दें।
प्रशासन का कहना है कि समय रहते सतर्कता बरतने से किसी भी संभावित आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकते हैं और जनहानि को रोका जा सकता है।






