बड़ी खबर : चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद भी अधर में यमुना पंपिंग पेयजल योजना

डेढ़ दशक से सरकारी फाइलों में उलझी योजना, डीपीआर अंतिम चरण में; जल्द शासन को भेजने का दावा बड़कोट (उत्तरकाशी), 31 अगस्त 2026। नीरज उत्तराखंडी नगर क्षेत्र की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रस्तावित यमुना पंपिंग पेयजल योजना करीब डेढ़ दशक बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। चार मुख्यमंत्रियों […]

  • डेढ़ दशक से सरकारी फाइलों में उलझी योजना, डीपीआर अंतिम चरण में; जल्द शासन को भेजने का दावा

बड़कोट (उत्तरकाशी), 31 अगस्त 2026। नीरज उत्तराखंडी

नगर क्षेत्र की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रस्तावित यमुना पंपिंग पेयजल योजना करीब डेढ़ दशक बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। चार मुख्यमंत्रियों की घोषणाओं के बावजूद योजना कभी सर्वे, कभी डीपीआर और कभी शासन की स्वीकृति के इंतजार में अटकी रही। अब जल निगम से योजना का गढ़वाल जल संस्थान पुरोला को हस्तांतरण होने के बाद एक बार फिर नई डीपीआर तैयार की जा रही है। जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार डीपीआर अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

नगर क्षेत्र में बढ़ती आबादी के साथ पेयजल की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन मौजूदा पेयजल संसाधन इस मांग को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रहे हैं। वर्तमान में पुरानी पेयजल योजना के साथ नलकूप के माध्यम से भी पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके बावजूद गर्मियों के दौरान नगरवासियों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय से यमुना नदी से पंपिंग कर नगर क्षेत्र में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की योजना को स्थायी समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।

चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा, फिर भी नहीं मिली मंजूरी

स्थानीय लोगों का कहना है कि यमुना पंपिंग पेयजल योजना को लेकर समय-समय पर प्रदेश के चार मुख्यमंत्रियों द्वारा घोषणाएं की गईं, लेकिन घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं। वर्षों से योजना को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ती रही, मगर निर्माण शुरू होने की स्थिति नहीं बन पाई। कभी सर्वे में संशोधन हुआ तो कभी डीपीआर तैयार करने और शासन से स्वीकृति लेने की प्रक्रिया में मामला अटक गया।

लोगों का आरोप है कि यदि शासन-प्रशासन योजना को लेकर गंभीरता दिखाता तो करीब डेढ़ दशक बाद भी नगरवासियों को पेयजल संकट से नहीं जूझना पड़ता।

डेढ़ महीने तक चला था आंदोलन

योजना को स्वीकृति दिलाने की मांग को लेकर जून 2024 में नगरवासियों ने करीब डेढ़ महीने तक आंदोलन किया था। आंदोलन के दौरान लोगों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए योजना को शीघ्र स्वीकृति देने की मांग उठाई थी। तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह विष्ट ने भी योजना की स्वीकृति के लिए गंभीर प्रयास किए जाने का भरोसा दिलाया था। इसके बावजूद करीब दो साल बीतने के बाद भी योजना को शासन की अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी है।

अब योजना के जल निगम से जल संस्थान पुरोला को हस्तांतरण के बाद नई डीपीआर तैयार किए जाने से लोगों में एक बार फिर उम्मीद जगी है। हालांकि, लंबे समय से घोषणाओं और प्रक्रियाओं के बीच उलझी योजना को लेकर नगरवासियों में संशय भी बना हुआ है।

फिर आंदोलन की चेतावनी

नगरवासी अजय रावत ने कहा कि चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद भी योजना का धरातल पर न उतरना शासन और प्रशासन की बड़ी लापरवाही है। उन्होंने कहा कि नगर क्षेत्र के लोग आज भी पर्याप्त और नियमित पेयजल आपूर्ति के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। यदि योजना को जल्द स्वीकृति नहीं मिली तो नगरवासी दोबारा आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।

डीपीआर अंतिम चरण में : ईई

गढ़वाल जल संस्थान पुरोला के अधिशासी अभियंता विनोद पांडेय ने बताया कि यमुना पंपिंग पेयजल योजना की डीपीआर अंतिम चरण में है। डीपीआर तैयार होने के बाद इसे जल्द शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

अब देखना यह है कि वर्षों से सरकारी फाइलों में उलझी यह योजना इस बार डीपीआर और स्वीकृति की प्रक्रिया से आगे बढ़कर वास्तव में धरातल पर उतर पाती है या फिर नगरवासियों को एक बार फिर नई घोषणा और नई डीपीआर का इंतजार करना पड़ेगा।

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