सनसनीखेज वीडियो : भाजपा विधायक ने किया अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश पर बड़ा खुलासा ! अब किसका इंतजार है सीएम को !!

भाजपा विधायक पूरन फर्त्याल ने अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है।
 अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश तथा पीडब्ल्यूडी के चीफ पुरोहित पर विधायक फर्त्याल ने फर्जी ठेकेदार को बचाने का आरोप लगाया है।
देखिए वीडियो

https://youtu.be/KAAeygs93To

 विधायक फर्त्याल ने कहा कि उन्होंने फर्जी प्रमाण पत्रों से ठेके हासिल करने वाले एक ठेकेदार और कर्मचारी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए मुख्यमंत्री से कहकर एफ आई आर दर्ज करवाई थी लेकिन ओमप्रकाश फाइल दबा कर बैठ गए हैं।
 विधायक फर्त्याल ने कहा कि 8 महीने से कर्मचारियों और ठेकेदार के खिलाफ टनकपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज है लेकिन उस की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ रही है और उसे ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया है तथा वह अन्य जगह भी अभी भी ठेके ले रहा है।
ओम प्रकाश ने दबाई फाइल
विधायक ने साफ-साफ कहा कि इस मामले को अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश और पीडब्ल्यूडी चीफ दबा रहे हैं। पूरन फर्त्याल ने यह भी कहा कि वह मुख्यमंत्री से मिले थे और मुख्यमंत्री ने तत्काल इसकी जांच करने एफ आई आर के आदेश दिए थे, उसमें एफ आई आर भी हो गई लेकिन अब अपर मुख्य सचिव इस मामले को दबा कर बैठ गए हैं।
सदन से सड़क तक लड़ेंगे विधायक
 फर्त्याल ने बताया कि यह सब मिले भी हैं। पूरन फर्त्याल ने इस घोटाले को एनएच घोटाले के बाद उससे भी बड़ा घोटाला बताते हुए कहा कि वह इस मामले को लेकर सदन से लेकर सड़क तक लड़ेंगे और यह घोटाला व्यक्तिगत रूप से अधिकारी और ठेकेदार ने मिलकर किया है।
 पूरन फर्त्याल ने कहा कि वह इस प्रदेश को लूटने नहीं देंगे। पूरन फर्त्याल ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने इस मामले में कुछ नहीं किया तो वह खुद ही इस लड़ाई को लड़ेंगे और तमाम जांच एजेंसियों और सभी संवैधानिक संस्थाओं की मदद लेंगे।
जीरो टोलरेंस पर गंभीर सवाल
 विधायक पूरन फर्त्याल के इस ऐलान के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की जीरो टोलरेंस की पॉलिसी पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि उनके ही विधायक भ्रष्टाचार को लेकर खुले आम मुखर हैं लेकिन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ओमप्रकाश के प्रति धृतराष्ट्र बन बैठे हैं।
 आप इस वीडियो को देखकर सहज ही अनुमान लगा सकते हैं इस प्रदेश में 100 दिन के अंदर लोकायुक्त लाने का घोषणा पत्र दिखाने वाली भाजपा सरकार 2 साल होने को है लेकिन अब लोकायुक्त बनाए जाने की बात से ही मुकर रही है। आखिर यह कैसा जीरो टोलरेंस है ! और यदि पत्रकार इन मामलों को उठाएं तो उन्हें किसी न किसी षड्यंत्र में फंसाने की कार्रवाई में पूरा पुलिस महकमा झोंक दिया जाता है। जाहिर है कि ऐसे घोटालों के खिलाफ आम जनता को भी मुखर होना पड़ेगा।

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