अगर जरूरी नहीं तो क्यों जा रहे न्यायालय?

दो  अप्रैल 2018 को नैनीताल हाईकोर्ट की डबल बेंच में एक बार फिर सुनवाई होगी। एक ओर डबल इंजन सरकार में एक साल से यह कहकर दायित्व नहीं बांटे कि इनकी कोई आवश्यकता नहीं। तमाम निगमों व परिषदों के पद खाली पड़े हैं। किसी भाजपा कार्यकर्ता या विधायक को भी वहां तैनाती नहीं दी जा रही। वहीं दूसरी ओर बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति भंग करने को लेकर ढाई लाख रुपए प्रति हियरिंग व हैली सर्विस देकर सुप्रीम कोर्ट के वकील लाए जा रहे हैं, ताकि किसी तरह बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति पर किसी और को बैठाया जा सके।


पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष पद पर तैनात किए गए कुंदन लाल सक्सेना, उत्तराखंड अनुसूचित जाति के अध्यक्ष हरपाल साथी, उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, उपाध्यक्ष अनवार अहमद, पी. सतीश जॉन, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजिनी कैंतुरा, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष किरनपाल वाल्मिकी, उत्तराखंड गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह रावत की तैनाती से डबल इंजन सरकार को कोई दिक्कत नहीं है।
इन तमाम आयोगों में कांग्रेस द्वारा उसी तरह से तैनाती दी गई, जिस प्रकार बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष के रूप में गणेश गोदियाल को तैनात किया गया था, किंतु बाकी सभी को छोड़कर मात्र मंदिर समिति के अध्यक्ष को हटाने को लेकर जिस प्रकार डबल इंजन सरकार लाखों रुपए फूंक चुकी है, वह किसी की समझ में नहीं आ रहा कि आखिरकार जब शेष सभी कांग्रेसियों से भाजपा सरकार को कोई दिक्कत नहीं तो फिर गणेश गोदियाल वाली कुर्सी पर ही ऐसा क्या शहद टपक रहा है, जिस पर सरकार किसी को बिठाना चाह रही है।

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