इस महिला हाॅस्टल में दो मिनट नही रुक सकते, ये है कारण

कुलदीप एस राणा
नरक बना महिला हॉस्टल, पिछले एक माह से चोक है हॉस्टल का सीवर, नरकीय माहौल में रहने को मजबूर छात्राएं
देहरादून चंद्रनगर स्थित स्टेट कॉलेज ऑफ नर्सिंग के छात्रावास में रहने वाली छात्राएं विगत एक माह से नरकीय यातनाएं झेलने को मजबूर हो रखी है। चिकित्साशिक्षा निदेशालय से मात्र चंद कदमो की दूरी पर स्थित नर्सिंग हॉस्टल की सीवर लाइन पिछले काफी समय से चोक हो रखी है जिस कारण सीवर हॉस्टल के शौचालय से बाहर निकल कर पूरे फ्लोर पर फैलता जा रहा है और अब दूसरे व तीसरे फ्लोर पर भी यही हाल होने जा रहा है।
बार बार सूचित करने के बावजूद हॉस्टल में सीवर लाइन को दूरस्त  किये  जाने को लेकर कोई प्रभावी कदम नही उठाये गए है। सीवर के शौचालय के फर्श पर फैले होने के कारण पूरे हॉस्टल में दुर्गन्ध ही दुर्गन्ध है। अस्वच्छ वातावरण और बरसात का मौसम होने के कारण गंदगी से होने वाली बीमारियों का खतरा भी छात्राओं के ऊपर मंडरा रहा है। सीवर के चोक हो जाने से हॉस्टल में रहना छात्राओं के लिए बड़ा यातना पूर्ण हो गया है।

“बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” व “स्वच्छ भारत अभियान” का नारा देने वाली सरकार के दौर में राजधानी के ही महिला हॉस्टल के शौचालय का यह हाल, उस पर अधिकारियों की लापरवाही सरकार के अभियान को पलीता लगाती प्रतीत हो रही है।
उक्त समस्या के संबंध मे स्टेट कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल आशा गंगोला का कहना है,-  “टैम्परेरी व्यवस्था के अंतर्गत मुझे प्रिंसिपल का चार्ज दिया गया है।  मेरे पास वित्तीय अधिकार नही है। नर्सिंग कालेज के वित्तीय अधिकार दून मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल के पास है जो फिलहाल छुट्टी पर हैं । मैंने मई माह में ही निदेशालय को चिट्ठी लिख कर बार-बार सीवर के चोक होने संबंधी समस्या पर सूचित कर दिया था।”
हॉस्टल में बीएससी नर्सिंग व एएनएम की लगभग 150 से 200 के करीब छात्राएं रह रही हैं। छात्राओं ने बताया कि पूरे हॉस्टल में अब मात्र तीन ही शौचालय इस्तेमाल के लायक बचे हैं। जिनमे वह शिफ्ट के हिसाब से अपनी नित्य क्रियाओं के साथ सामंजस्य स्थापित करने को मजबूर हैं।
दूसरे  हॉस्टल में रहने वाली छात्रा ने बताया कि उनके यहां पानी बहुत समस्या है। बाथरूम में पानी नही आता है और उन्हें अपने रोजाना के कार्यों के लिए भी बाहर नल से पानी भरकर लाना पड़ता है।
ऐसे में तंत्र की खामियों का खामियाजा हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।

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