एक्सक्लूसिव: उत्तरा प्रकरण में बड़ा खुलासा ।

पिछले एक सप्ताह से सभी सोशल मीडिया में घूम रहा उत्तरा का सस्पेंशन लेटर अभी तक जिला शिक्षा अधिकारी केएस चौहान ने अपने दफ्तर से ही जारी नहीं किया है।  उत्तरकाशी के जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा के एस चौहान ने 29 जून को प्राथमिक विद्यालय नौगांव उत्तरकाशी में कार्यरत 57 वर्षीय उत्तरा बहुगुणा को […]

पिछले एक सप्ताह से सभी सोशल मीडिया में घूम रहा उत्तरा का सस्पेंशन लेटर अभी तक जिला शिक्षा अधिकारी केएस चौहान ने अपने दफ्तर से ही जारी नहीं किया है।
 उत्तरकाशी के जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा के एस चौहान ने 29 जून को प्राथमिक विद्यालय नौगांव उत्तरकाशी में कार्यरत 57 वर्षीय उत्तरा बहुगुणा को इस आरोप के कारण निलंबित कर दिया था कि वह बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति के मुख्यमंत्री जनता दरबार में गई थी और वहां अभद्रता की थी।
 29 जून को दोपहर में ही यह पत्र पूरे सोशल मीडिया यूजर के हाथों में था, किंतु हकीकत यह है कि आज तक यह पत्र उत्तरा बहुगुणा को रिसीव नहीं हुआ है।
 केएस चौहान ने पर्वतजन से फोन पर बातचीत में स्वीकारा कि यह पत्र अभी तक उनके कार्यालय से भेजा ही नहीं गया है और यह पत्र अब सोमवार तक भेजा जाएगा।
 अहम सवाल यह है कि जब यह पत्र अभी तक जारी ही नहीं किया गया तो फिर निलंबन आदेश के दिन ही यह सरकारी दस्तावेज किस अधिनियम के तहत सोशल मीडिया पर वायरल किया गया और एक सप्ताह से भी अधिक समय गुजर जाने के बाद भी डबल इंजन सरकार के अधिकारियों की यह कौन सी स्पीड है कि अभी तक यह पत्र जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय से चला ही नहीं है।
 इस निलंबन आदेश में यह लिखा है कि निलंबन अवधि में उत्तरा बहुगुणा उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय नौगांव उत्तरकाशी से संबंध रहेंगी, किंतु उत्तरा बहुगुणा को यह पत्र अभी तक न मिलने से वह यह तय नहीं कर पा रही है कि वह विद्यालय में ज्वाइन करें अथवा उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय में हाजिरी दे।
 उत्तरा बहुगुणा का कहना है कि वह अभी तक इस पत्र का इंतजार कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि जैसे ही यह निलंबन का पत्र मिलेगा, वैसे ही उत्तरा बहुगुणा इसको लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।
 इधर देश के सबसे महंगे और चर्चित एडवोकेट राम जेठमलानी उनका केस निशुल्क लड़ने को तैयार बैठे हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य सीनियर वकील राजेश त्यागी ने तो इस प्रकरण के दूसरे दिन ही बाकायदा सोशल मीडिया पर अपना नंबर जारी करते हुए उनका केस निशुल्क लड़ने का प्रस्ताव दे दिया था।
 शुक्रवार को उत्तरा बहुगुणा की बहन विजया पंत तुली ने भी मीडिया से मुखातिब होकर उत्तरा के “मानवाधिकारों के हनन” की बात मीडिया के सामने रखी।उन्होंने सवाल उठाया कि डिजिटल इंडिया के दौर मे सस्पेंसन लेटर अभी तक कैसे नही मिला !
 देखना यह है कि निलंबन का आदेश प्राप्त होने के बाद गेंद उत्तरा के पाले में होगी और उनका क्या रुख रहता है !

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