एक्सक्लूसिव: निशंक को जिताना है या निशंक को भगाना है?

कुमार दुष्यंत/हरिद्वार हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी डा. रमेश पोखरियाल निशंक का प्रचार जोरदार ढंग से चल रहा है।मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री उनके चुनाव प्रचार को धार देने में जुटे हुए हैं।पार्टी से कहीं अधिक ‘सरकार’ निशंक के चुनाव में जिस समर्पण से जुटी हुई है,उसके अलग ही निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। माना जा […]

कुमार दुष्यंत/हरिद्वार

हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी डा. रमेश पोखरियाल निशंक का प्रचार जोरदार ढंग से चल रहा है।मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री उनके चुनाव प्रचार को धार देने में जुटे हुए हैं।पार्टी से कहीं अधिक ‘सरकार’ निशंक के चुनाव में जिस समर्पण से जुटी हुई है,उसके अलग ही निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।

माना जा रहा है कि सरकार में कुछ लोग निशंक को हर हाल में हरिद्वार से विजयी बना कर राज्य से विदा करना चाहते हैं।जिससे कि सूबे की राजनीति उनके लिए निरापद बनी रहे।


निशंक के प्रचार में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इतनी रुचि नहीं दिखा रहे, जितनी कि मुख्यमंत्री।मुख्यमंत्री निशंक के समर्थन में हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र में अबतक आधा दर्जन से भी अधिक जनसभाएं कर चुके हैं।वह नामांकन के वक्त भी नामांकन कक्ष में निशंक के साथ मौजूद रहे।

सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं केबिनेट मंत्री प्रकाश पंत भी उनके साथ रहे।इतना ही नहीं टिकट की लडाई में अंत तक संघर्ष करने वाले पार्टी में निशंक के चिर-प्रतिद्वंदी मंत्री मदन कौशिक भी इसबार निशंक के लिए खूब पसीना बहाते देखे जा रहे हैं।

इसका मतलब यही निकाला जा रहा है कि निशंक के प्रचार में जुटे इन सभी महानुभावों का लक्ष्य निशंक को विजयी बनाना है।लेकिन इस विजय का प्रयोजन निशंक को सूबे की राजनीति से दूर करना ही माना जा रहा है।
राज्य में दो वर्ष की भाजपा सरकार के मुखिया को बदलने की चर्चा कई मर्तबा चली।इसके पीछे निशंक का नाम भी जोड़ा जाता रहा।त्रिवेंद्र रावत के विकल्प के रूप में सौम्य प्रकाश पंत का नाम भी उछाला जाता रहा है।

सरकार के प्रवक्ता व ताकतवर मंत्री मदन कौशिक की भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर निगाह है।मुख्यमंत्री त्रिवेंद्रसिंह रावत को लेकर सूबे में ऊहापोह का दौर अभी समाप्त नहीं हुआ है।ऐसे में मुख्यमंत्री को जहां ऐसी संभावनाएं टालनी हैं।वहीं इस कुर्सी के दावेदार अपनी संभावनाएं बनाए रखना चाहते हैं।निशंक के सूबे की राजनीति में लिप्त रहते यह सारे समीकरण गडबड़ा सकते हैं।

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