कर्णवाल को पटकने अखाड़े पहुंचे चैंपियन। कर्णवाल गायब। राजभवन पहुंचा मामला

उत्तराखंड में चुनाव का घमासान भले ही 11 अप्रैल को वोटिंग के साथ ही समाप्त हो गया हो लेकिन चुनाव के पहले से चला आ रहा भाजपा के दो विधायकों का दंगल आजकल अपने चरम पर चल रहा है।
 झबरेड़ा के विधायक देशराज कर्णवाल और खानपुर के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का झगड़ा राज भवन में उठाया जा रहा है।
 कांग्रेस ने इस पूरे झगड़े को लपक कर मुद्दा बना लिया है और कहा है कि इस मामले में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि भाजपा के झगड़े से भाजपा के अनुशासन का पता चलता है।” एक विधायक अगर दूसरे विधायक की डिग्री को फर्जी बता रहा है तो यह मामला गंभीर है।” प्रीतम सिंह ने बताया कि वह राज्यपाल से मुलाकात कर के फर्जी प्रमाण पत्रों की जांच की मांग करेंगे।
इधर इन सब से बेपरवाह आज कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन 12:30 बजे झबरेड़ा के विधायक देशराज कर्णवाल को कुश्ती के लिए ललकारते हुए नेहरू स्टेडियम में पहुंच गए थे लेकिन झबरेड़ा विधायक कर्णवाल नहीं पहुंचे।
गौरतलब है कि कर्णवाल ने चैंपियन को फर्जी चैंपियन बताया था और उन पर तमाम आरोप लगाते हुए यह भी कहा था कि वह कोई राजवंश से नहीं है बल्कि सामंत परिवार से हैं।
 यही नहीं कर्णवाल ने यह भी कहा था कि उनकी आई एफ एस आदि की बातें भी फर्जी है और वह गिल्ली डंडा तक नहीं खेल सकते।
 इन आरोपों के बाद तैश में आए कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने उन्हें कुश्ती के लिए नेहरू स्टेडियम में ललकारा था। जब आधा घंटे बाद भी कर्णवाल नहीं पहुंचे तो फिर चैंपियन ने प्रेस से कहा कि यदि देशराज कर्णवाल ने मां का दूध पिया है तो सामने आए।
 यही नहीं चैंपियन ने यह भी कहा कि वह एक थप्पड़ से उनके कान और मुंह से खून निकाल कर उसे जमीन पर पटक देंगे। देशराज कर्णवाल तो नहीं पहुंचे लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से मौके पर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद था।
 हालत यह है कि इन दोनों भाजपा विधायकों का झगड़ा हाईकमान तक से अभी तक नहीं निपटा है और राज्य तथा केंद्र संगठन इस मामले में चुप्पी साधे हुए है, वहीं इस मामले को कांग्रेस लपक कर राजभवन में उठाने जा रही है।
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि अनुशासन वाली पार्टी कहलाने का दावा करने वाली भाजपा इस मामले में क्या कदम उठाती है !
 जाहिर है कि दोनों विधायक मर्यादाओं की सभी सीमाएं पार कर गए हैं और इसके छींटे ना सिर्फ भाजपा संगठन पर पड़ रहे हैं बल्कि प्रचंड बहुमत की सरकार का दमन भी इनके झगड़े से दागदार होने लगा है।

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