चाटुकारिता में मर्यादा भूला सूचना विभाग।

खबर के असर के बाद ख़बर का खंडन छापने का अधिकारियों के अंदाज में सोशल मीडिया ग्रुप पर देने लगे निर्देश। उत्तरकाशी सूचना विभाग को और प्रशिक्षण की दरकार।
गिरीश गैरोला
उत्तरकाशी जनपद में धूम्रपान निषेध और तंबाकू निवारण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में कार्यालयों के बाहर लगाए गए सूचना पट पर संबंधित अधिकारी का नाम दर्ज किए बिना फ्लेक्सी दीवार पर लगाये जाने के बाद पर्वतजन द्वारा खबर बनाई गई थी । सीएमओ के मौके पर मौजूद न होने के बाद जिलाधिकारी से इस संबंध में जानकारी चाही गयी थी। डीएम डाॅ. आशीष कुमार ने स्वीकार किया कि इस संबंध में काम को टालने की प्रवृत्ति से अधूरा काम किया गया है, जिससे एक बड़े मकसद वाले कार्य पर अधिकारियों का दृष्टिकोण परिलक्षित होता है।
डीएम ने संबंधित विभाग को मौके पर ही कड़ी फटकार लगाते हुए इसे तत्काल ठीक कराने के निर्देश दिए । जिसकी बाइट पर्वतजन के पास मौजूद है। गौरतलब है कि इसमें से एक पोस्टर /फ्लेक्सी सूचना अधिकारी बद्री प्रसाद के कमरे के बाहर भी लगी थी कि सूचना अधिकारी बद्री प्रसाद आजकल अवकाश पर है।
 अपने कक्ष के बाहर लगे सूचना फ्लेक्सी पर तत्काल पेपर प्रिंट आउट निकल कर लगाने के बाद , डीएम के समक्ष अपने नंबर बढ़ाने के चक्कर मे सूचना विभाग के कर्मचारी सुरेश कुमार ने प्रेस मीडिया सोसल व्हाट्सअप ग्रुप पर और इंडिया न्यूज ग्रुप पर पर्वतजन संवाददाता के नाम निर्देश जारी करते हुए खबर का खंडन प्रकाशित करने का अनाधिकृत फरमान जारी कर दिया।
 जब उन्हें बताया गया कि खबर के बाद डीएम के निर्देश पर ही कार्यवाही हुई है, जिसके लिए डीएम द्वारा तत्काल कार्यवाही की खबर तो प्रकाशित की जा सकती है, जैसा कि पूर्व में कई बार डीएम के उत्कृष्ट कार्यो के लिए ऐसा किया जाता रहा है, किंतु सूचना विभाग के कर्मचारी सोसल मीडिया पर ही खंडन छापने की जिद पर अड़ गए। जब उन्हें खंडन का औचित्य पूछा गया कि अजीब तर्क पेश करते हुए जनपद में पत्रकारों की कुल संख्या उनमें से मान्यता प्राप्त पत्रकारों की संख्या और आफिस में आकर उन्हें भूल सुधार करने का सुझाव देने लगे।
आखिर मान्यता देने में सूचना विभाग की भूमिका को लेकर क्या इस तरह का दबाव बनाया जाना उचित है?
उन्हें फिर समझाया गया कि सूचना विभाग पत्रकारों का अधिकारी नही है, जो उन्हें अपने मन माफिक खबर प्रकाशित करने के निर्देश दे सके, ये तो जिला अधिकारी और मीडिया के बीच एक सेतु का कार्य करता है। किंतु लगता है सूचना विभाग को अपने कर्मचारी को अपने कार्य से संबंधित अभी और प्रशिक्षण की जरूरत है।

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