…..तो “चमार” हैं शांतिकुंज के प्रमुख डॉ प्रणव पंड्या !

कल 27 जून को हरिद्वार में आचार्य सभा की बैठक के बाद डॉ पंड्या ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के बारे में कुछ ऐसी बात कह दी, जिसकी उम्मीद कांग्रेस पार्टी तो दूर देश भर में फैले उनके असंख्य समर्थकों और अनुयायियों और प्रशंसकों को भी नहीं होगी।
 डॉ पंड्या ने पत्रकारों से कहा कि राहुल गांधी की शक्ल उन्हें पसंद नहीं है और न कांग्रेस की नीतियां।
 कांग्रेस की नीतियों पर पसंद-नापसंद तो एक व्यक्तिगत मसला है, किंतु शांतिकुंज के प्रमुख तथा हिंदू धर्म आचार्य महासभा के महामंत्री डॉ पंड्या से राहुल गांधी की शक्ल पर टिप्पणी से हर कोई भौंचक हैं।
 डॉ पंड्या की टिप्पणी ने त्रेता युग के राजा जनक की सभा में शास्त्रार्थ के लिए एकत्रित हुए समस्त विश्व के आचार्यों के साथ अष्टावक्र के संवाद की याद दिला दी है। अष्टावक्र अपने पिता कोहड़ ऋषि के श्राप के कारण माता के गर्भ से ही अष्टावक्र पैदा हुए थे। अष्टावक्र शरीर से आठ अंगों से टेढे थे।
 अष्टावक्र जब राजा जनक की सभा में शास्त्रार्थ करने पहुंचे तो समस्त आचार्यों और संतों की सभा के साथ-साथ राजा जनक भी उनके शरीर की बनावट देखकर हंसने लगे।
 उन्हें हंसता देख अष्टावक्र भी हंसने लगे। जब हंसी का दौर रुका तो राजा जनक पूछ बैठे कि औरों की हंसी तो समझ में आती है लेकिन अष्टावक्र ! आप क्यों हंसे !
 इस पर अष्टावक्र बोले कि राजा मैं इसलिए हंसा कि मैं तो संतों की सभा में शास्त्रार्थ करने के लिए आया था किंतु यह तो आपने चमारों की सभा बुला रखी है। क्योंकि यह मुझे नहीं जानते, मेरे अंदर जो निर्विकार है उसको नहीं जानते और मेरे शरीर और चमड़ी की परख पर यह लोग हंसे।चलो ये हंसे तो हंसे, लेकिन राजा जनक आप तो विदेह हैं! आप क्यों हंसे ! बस इसीलिए मुझे हंसी आ गई। इतना सुनना था कि राजा जनक पश्चाताप से भर उठे और उन्हें सत्य का जो आभास हुआ तो उन्होंने अष्टावक्र को अपना गुरु बना लिया। इसके पश्चात ‘अष्टावक्र महागीता’ की जो रचना हुई संभवतः डॉ प्रणव पंड्या ने भी वह जरुर पड़ी होगी।नही पढी तो पढनी चाहिए।
 कल 27 जून को आचार्य शिरोमणि डॉ प्रणव पंड्या के इस बयान को अष्टावक्र और जनक के संवाद से जोड़ कर देखें तो त्रेता युग से लेकर अब तक क्या संतों का ज्ञान सिर्फ शक्ल और चमड़ी की पसंद- नापसंद पर ही अटका है ! यह एक बड़ा सवाल है !
 गौरतलब है कि पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह डॉ पंड्या से बंद कमरे में मुलाकात कर गए थे। तब डॉ पंड्या भाजपा को समर्थन देने पर राजी हो गए थे और उनका कहना था कि वह अपने शिष्यों से अपील कर सकते हैं लेकिन जबरदस्ती नहीं ! उसी दिशा में और आगे बढ़ते हुए उन्होंने कल यह कह दिया कि उन्हें राहुल की शक्ल भी पसंद नहीं है और न कांग्रेस की नीतियां ही। साथ ही उन्होंने कहा कि राहुल यदि हरिद्वार आए तो उन्हें मिलने के लिए लाइन में लगना पड़ेगा उन्हें कोई स्पेशल ट्रीटमेंट अमित शाह की तरह नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने भाजपा को जो इशारा करना था कर दिया।
 कुछ समय पहले भाजपा ने प्रणव पंड्या को राज्यसभा सांसद बनाने के लिए मनाना चाहता तो देश भर में फैले उनके अनुयायियों और समर्थकों ने उन्हें ऐसा करने से मना किया था। इस पर प्रणव पंड्या ने कदम पीछे खींच लिए थे।
 जाहिर है कि शांतिकुंज के अनुयायियों में सिर्फ भाजपा समर्थक लोग ही नहीं है, बल्कि अन्य पार्टियों के समर्थक भी बड़ी मात्रा में शांतिकुंज तथा पंड्या के समर्थक, प्रशंसक और अनुयाई हैं। ऐसे में डॉ पंड्या के भाजपा की तरफ झुकाव होने से उनको झटका लग सकता है। हालांकि अभी इस बयान पर कांग्रेस अथवा उनके अनुयायियों की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन पर्वतजन ने जब कुछ लोगों से उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही तो वे अवाक दिखे।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह कहते हैं,-” एक धर्म गुरू यदि अपनी शरण मे आने वाले व्यक्तियों की शक्ल पसंद न आने की बात कहते हैं तो यह उनके मानसिक स्तर को दर्शाता है।
 उत्तराखंड कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दशौनी कहती है कि वह डॉ पंड्या को रोल मॉडल मानती हैं और दलीय राजनीति से इतर उनके असंख्य प्रशंसक हैं। उन जैसे व्यक्तित्व द्वारा एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के लिए ऐसा बयान सचमुच हतप्रभ करने वाला है।
आम लोगों का भी यही मानना है कि अतिथि देवो भव की भूमि में डॉ पंड्या का ऐसा बयान विस्मित करने वाला है। राहुल गांधी के आने पर उन्हें अमित शाह जैसा ट्रीटमेंट न देने के बयान के औचित्य समझ से परे हैं। लोग पूछ सकते हैं कि एक संत की नजर से आखिर अमित शाह में ऐसा क्या है कि उन्हें ट्रीटमेंट दिया जाएगा !
टिहरी कांग्रेस के नगर अध्यक्ष तथा पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष  देवेंद्र नौडियाल कहते हैं कि राहुल गांधी शांतिकुंज आना चाहें या ना आना चाहें, यह एक अलग बात है, लेकिन ऐसा बयान पहले ही उनका तिरस्कार करने वाला जरूर लगता है।
देखना यह है कि कांग्रेस तथा कांग्रेस पार्टी के लोग इस पर क्या प्रतिक्रिया जाहिर करते हैं !

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