निशंक, खंडूड़ी, कोश्यारी व बहुगुणा को त्रिवेंद्र की खुली चुनौती!

उत्तराखंड सरकार द्वारा एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर भ्रष्टाचार पर प्रहार-टीएसआर के नाम से विज्ञापन ही नहीं बांटे गए, बल्कि प्रदेशभर में वैध-अवैध होर्डिंग भी लगााए गए। 18 मार्च 2018 को देहरादून में परेड ग्राउंड में जो पहली वर्षगांठ पर कार्यक्रम आयोजित किया गया, वहां भी भ्रष्टाचार पर प्रहार जैसे होर्डिंग जगह-जगह लगाए गए। इससे पहले शुक्रवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

 

जीएमएस रोड स्थित हिंदुस्तान अखबार के कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे ज्यादा भ्रष्टचार पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि डबल इंजन सरकार आने के बाद उत्तराखंड से माफियाराज खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय के चौथे माले, जहां वे स्वयं बैठते हैं, को अब भ्रष्टाचारमुक्त करने की बात कही। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि सचिवालय का चौथा माला उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले जहां माफिया तंत्र सक्रिय रहता था, आज उस चौथेे माले को माफियाओं से मुक्त कर दिया गया है।त्रिवेंद्र सिंह रावत की बात से पूरे प्रदेश में यह संदेश गया कि उनसे पहले जो भी मुख्यमंत्री थे, उन्होंने चौथे माले में बैठकर माफियाओं को संरक्षण दिया। कांग्रेस के हरीश रावत को छोड़कर सभी मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी के हैं। सूबे के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी अब इस दुनिया में नहीं हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के निवास पर पहुंचने वाले नारायण दत्त तिवारी के बारे में तब यह बताया गया कि उन्होंने भी भाजपा ज्वाइन कर ली है। तिवारी से पहले मुख्यमंत्री रहे भगत सिंह कोश्यारी और तिवारी के बाद के जनरल भुवनचंद्र खंडूड़ी, रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा सब भारतीय जनता पार्टी में हैं।

त्रिवेंद्र रावत द्वारा सचिवालय के चौथे माले को माफियामुक्त करने पर विजय बहुगुणा, भुवनचंद्र खंडूड़ी, रमेश पोखरियाल निशंक, भगत सिंह कोश्यारी की ओर से कोई प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है।
देखना है कि इन सबके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इस मुद्दे पर कब जवाब देते हैं।

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