लकड़ी के लट्ठों और साड़ियों के सहारे “ऊर्जा प्रदेश” !

कृष्णा बिष्ट
बागेश्वर जनपद के गरुड़ तहसील के अंतर्गत पड़ने वाले ग्राम मैगडी स्टेट में वर्ष 2013 से ही बिजली विभाग की लापरवाही यहाँ के लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “हर घर बिजली” के सपने को बिजली विभाग ठेकेदार के संग मिल कर चीड़ के पेड़ व लकड़ी के लट्ठों के सहारे पूरा करने की सोच रहा है।
बिजली विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से लोहे के खम्भों के स्थान पर चीड़ के पेड़ व लकड़ी के लट्ठों पर ही बिजली के तार बांध दिए गए हैं, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं।
हर रोज का पावर कट अब मैगडी स्टेट के लोगों की नियति से जुड़ गया है, अगर कभी ग्रामीण इस की शिकायत बिजली विभाग के इंजिनियरों से करें भी तो बिजली विभाग के इंजिनियर फ़ोन उठाने की ज़हमत तक नहीं उठाते।
यही नहीं, क्षेत्र के अधिकतर स्थानों पर बिजली के तारों को बड़ी आसानी से हवा मे झूलते हुए देखा जा सकता है, जो हल्की हवा चलने पर भी आपस मे टकरा जाते हैं, इस परेशानी से बचने के लिये तारों को कसने के बजाय विभाग ने इस का एक नायाब ही तरीका निकला है, ऐसे तारों को महिलाओं की धोती के कपड़े के सहारे पेड़ पर बांध दिया जाता है।
 कई इलाकों मे तो एक पोल से दूसरे पोल की दूरी हद से अधिक है। फिर भी इन पोलों पर बिजली के तार जोड़ दिए गये हैं, जिस कारण इन पोलों पर तार खतरनाक तरीके से झूलते रहते हैं।
जिलाधिकारी रंजना राजगुरु का इस विषय पर मानना है कि, इस प्रकार का कार्य लोगों की जान के साथ खिलवाड़ है,-” मै इस विषय पर विभाग को तुरन्त कार्यवाही का निर्देश दे रही हूँ, और मैं खुद इस का फॉलोअप लूंगी।”
भास्कर पाण्डेय (अधिशासी अभियंता विधुत विभाग बागेश्वर) का कहना है कि उन के पास इस प्रकार की कोई जानकारी नहीं है,-” अगर ऐसा है तो, ये अपने आप मे बहुत बड़ा घोटाला है, लकड़ी के लट्ठों पर तार किस प्रकार लग गये, इस की जाँच करवाता हूं।”
यह तो बिजली विभाग की कारगुजारियों का एक छोटा सा नमूना है, इस प्रकार के कई अन्य काम इस विभाग के नाम चढ़े हुए हैं, जहाँ विभाग और ठेकेदार मिल कर सरकार को चूना लगाने मे लगे हुए हैं।

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