सहारनपुर को उत्तराखंड में शामिल करने का विरोध। सरकार का पुतला फूंका

मोहित डिमरी। रुद्रप्रयाग

सहारनपुर को उत्तराखंड मे शामिल करने के विरोध सरकार का पुतला फूंका। किसी भी सूरत में यूपी के किसी भी हिस्से को उत्तराखंड में नहीं होने देंगे शामिल: आंदोलनकारी। संघर्ष समिति की बैठक में राजधानी आंदोलन के लिए बनी अग्रिम रणनीति

मुख्यमंत्री के सहारनपुर को उत्तराखंड में शामिल करने के बयान के विरोध में स्थायी राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति ने सरकार का पुतला फूंका। आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री से अपने बयान वापस लेने की मांग की। साथ ही आंदोलनकारियों ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग की।

आज स्थायी राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री के सहारपुर को उत्तराखंड में शामिल करने के बयान की भर्त्सना करते हुए सरकार का पुतला दहन किया। आंदोलनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड की मांग के पीछे यही मकसद था कि पर्वतीय क्षेत्रों का विकास हो सके। लेकिन सरकार यूपी के एक हिस्से को उत्तराखंड में शामिल कर पहाड़ी प्रदेश की मूल अवधारणा ही खत्म करना चाहती है। सरकार गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के बजाय यूपी के हिस्सों को उत्तराखंड में शामिल करने की पैरवी कर रही है। सरकार का दोहरा चरित्र सामने आ गया है।

गैरसैंण राजधानी संघर्ष समिति के अध्यक्ष मोहित डिमरी ने कहा कि सरकार की पहाड़ विरोधी सोच जनता के सामने आ गई है। सरकार पहाड़ की उपेक्षा कर मैदानी क्षेत्रों को विस्तार दे रही है। किसी भी सूरत में उत्तराखंड में यूपी के किसी भी हिस्से को शामिल नहीं होने दिया जाएगा।

पुतला दहन के बाद आयोजित संघर्ष समिति की बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। साथ ही निर्णय लिया गया कि आंदोलन को धार देने के लिए ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत, नगर पंचायत और पालिका अध्यक्षों से मुलाकात कर आंदोलन से जनप्रतिनिधियों को जोड़ा जाएगा। इस मौके पर कार्यकारिणी को विस्तार देते हुए जखोली ब्लॉक संयोजक की जिम्मेदारी रमेश नौटियाल को दी गई। बंटी जगवाण को यूथ संयोजक नामित कर युवाओं को जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई। इसी तरह लक्ष्मण रावत को रुद्रप्रयाग शहर और हीरा सिंह नेगी को तल्लानागपुर संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई।

इस मौके पर पूर्व पालिका अध्यक्ष देवेन्द्र झिंक्वाण, सत्यपाल नेगी, राय सिंह रावत, केपी ढौंडियाल, विनोद डिमरी, प्यार सिंह नेगी, अशोक चौधरी, लक्ष्मण सिंह रावत, पुरूषोत्तम चन्द्रवाल, बंटी जगवाण, प्रदीप चौधरी, बुद्धि बल्लभ ममगाई, जोत सिंह बिष्ट, महावीर रौथाण, बुद्धि लाल, कुलदीप राणा, नरेश भट्ट, शैलेन्द्र गोस्वामी, रमेश नौटियाल, राय सिंह बिष्ट, हीरा सिंह नेगी, मोहित डिमरी समेत अन्य आंदोलनकारी मौजूद थे।

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