खुलासा: क्यों नही मिला त्यूनी झूला पुल पर प्रसव कराने वाली महिला को डाक्टर!!

 उत्तराखंड के देहरादून जिले के सुदूर सुदूर त्यूनी झूला पुल पर ही प्रसव कराने को मजबूर महिला की व्यथा कथा पर्वतजन ने प्रमुखता से दिखाई थी। अब देखिए कि आखिर क्यों नही था, उस हास्पीटल मे कोई डाक्टर! चिंतन कीजिये कि कौन है इसका जिम्मेदार!
स्थानीय समाजसेवी भारत राणा की जुबानी!
त्यूनी स्वास्थय केन्द्र की स्थिति सुधारने के लिए हमने मई 2017 में CMO से मुलाकात कर एक ज्ञापन दिया था और उसकी प्रति  मुख्यमंत्री जी को भी भेजी लेकिन कोई उचित कदम नही उठा।
फिर हमने जून के पहले सप्ताह में  6 दिन का अनिश्चित कालीन धरना करा तो वहाँ डिप्टी CMO डाक्टर संजीव दत्त आये व अपने साथ दो एक महिला व एक पुरुष डाक्टर को लेकर पहुंचे ये सभी तीन दिन बाद केन्द्र से गायब हो गये। फिर हमने DG रावत जी से मुलाकत की और  पुरे मामले को संज्ञान में डाला तो वहाँ के लिए एक डाक्टर अभिषेक गुप्ता को भेजा गया जो कि एक एक्सीडेंट का इलाज कराने आए मरीज के परिजनो तथा  कुछ ग्रामीण के साथ कहासुनी होने पर वहाँ से चले आये। कहा कि मुझे वहाँ जान का खतरा बना हुआ है, जबकि सच्चाई ये है कि वहां कोई अपनी सेवा नही देना चाहता। यदि जान का खतरा था तो क्यों पुलिस कार्यवाही नही हुई! दो माह पूरे हो गये लेकिन उनके खिलाफ न जांच हुई और न कार्यवाही।
फिर हमने पुनः वर्तमान CMO को मामले की शिकायत से कार्यालय पर जाकर, मुलाकात करके अवगत कराया तो उन्होंने कहा कि जल्द जाँच करके डाक्टर को भेजा जायेगा, लेकिन दो सप्ताह होने के बाद हमने पुनः वर्तमान DG हेल्थ से मुलाकाल की तो वंहा से भी आश्वासन मिला कि एक सप्ताह में एक डाक्टर को भेजा जायेगा और बाकी शासन से मांग की जा रही है और यह मामला हमारे संज्ञान में है और शासन से स्वीकृति मिलते ही उचित स्टाफ भेजा जायेगा।
कांग्रेस सरकार के समय इस केन्द्र मे   कुल छोटे बड़े 14 कर्मचारी कार्यरत थे,जिसमे तीन डाक्टर थे।
 1-राजीव कुमार दीक्षित को सहिया अटैच किया  वह भी महीने में 10-12 दिन अपनी सेवा त्यूनी में देते थे ।
2-डाक्टर बलविन्द्र भी 15-20 दिन अपनी सेवा दिया करते थे ।
3- डाक्टर रावत जी  तो कभी अपने घर भी नही जाते थे। सदैव अपनी सेवा के लिए केन्द्र पर तैयार रहते थे
 स्टाफ नर्स भी कार्यरत थी जो कि अब नही है।
बाकी अन्य स्टाफ भी कुछ मौजूद रहता ही था लेकिन वर्तमान सरकार आते ही डाक्टरों को चार धाम यात्रा ड्यूटी  मे भेजा गया और उसके बाद ट्रांसफर नीति लागू होते ही इनका स्थानान्तरण कर दिया और इस केन्द्र को राजनितिक अखाड़ा बना कर खाली छोड दिया गया।

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