डीएम ने माना: ये अफसर रोकता है रिश्वत के लिए फाइल

koshadhikari office
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उत्तरकाशी  जिले के कोषागार मे तत्कालीन तैनात प्रभारी कोषाधिकारी पर रिश्वत लेने और शराब के नशे मे उच्च अधिकारियों की गाली –  गलोज कर शांति  भंग करने के लिखित शिकायत के बाद भी कार्यवाही करने के बजाय आरोपी को पुरोला कोषागार का प्रभारी बनाकर प्रोत्साहन देने से विभाग की कार्यवाही पर सवाल उठने लगे हैं।

डीएम डॉ आशीष कुमार श्रीवास्तव की मानें तो संबन्धित विभाग के निदेशालय को शिकायत के साथ कार्यवाही के लिए भेज दिया गया है किन्तु दो वर्ष बाद अभी भी  कार्यवाही का इंतजार ही हो रहा है।
जिले के सीडीओ और एसपी समेत आधा दर्जन जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा जिला कोषागार मे तैनात सहायक कोषाधिकारी के खिलाफ बिना रिश्वत के फ़ाइल आगे नहीं बढ़ाने की लिखित शिकायत के बाद भी उच्चाधिकारी कार्यवाही  के नाम पर कागजों को  यहां से वहां दौड़ा रहे हैं। आलम ये है कि आरोपी के खिलाफ फ़ाइल तो मोटी होती जा रही है, किन्तु आरोपी अधिकारी को पुरोला मे प्रभारी बना कर मामले पर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है।
सूबे मे “न भय न भ्रस्टाचार-अबकी बार बीजेपी सरकार” के लुभावने नारे  के साथ प्रचंड बहुमत की सरकार आते ही अपनी ज़ीरो टोलरेंस की नीति का खूब बखान मीडिया मे  किया था।अब तो खुद इस दावे मे भी मिलावट की बू आने लगी है।
 उत्तरकाशी जनपद मे  ट्रेजरी विभाग के  सहायक कोषाधिकारी बीएस  राणा के काले कारनामों की करतूत किसी से छुपी नही है।
पर्वत जन  के हाथ इसके पुख्ता सबूत लगे  हैं। लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड चिन्यालीसौड, लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड उत्तरकाशी, सिंचाई विभाग, युवा कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल ,पुलिस विभाग  सहित कई अन्य सरकारी विभागों ने उक्त कर्मचारी पर जानबूझ कर उनकी फ़ाइल रोकने और अकारण आपत्ति लगाए जाने की  लिखित शिकायत उच्चाधिकारियों से की थी।
इतना ही नहीं विभाग की सुरक्षा मे तैनात गार्ड कमांडर ने भी उक्त कर्मचारी पर अशांति फैलाने का आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र भेजा है।  हर फ़ाइल पर रिश्वत की मांग करने वाले इस कर्मी ने सीडीओ ऑफिस को भी नहीं बख्शा।
विभाग के इस भ्रष्ट अधिकारी के  पास जनवरी  2015 से लेकर जून 2015 तक ट्रेजरी ऑफिसर का भी प्रभार दिया गया था।
तमाम शिकायत मिलने के बाद वरिष्ठ  कोषाधिकारी हिमानी स्नेही ने अधीनस्थ कर्मचारियों की  बैठक बुलाकर कड़ी हिदायत  दी। आरोप है कि इस दौरान भी उक्त कर्मी ने उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण नियमवाली 2002 का उल्लंघन करते हुए मादक पदार्थ का सेवन करते हुए कार्यालय  मे उत्पात मचाया और उच्चधिकारियों के खिलाफ गाली  गलोज की । वरिष्ठ कोषाधिकारी के पत्रांक संख्या342 दिनांक 17 जुलाई 2017 जो  डीएम और अपने निदेशक कोषागार पेंशन एवं हकदारी को लिखा गया शिकायती  पत्र इसकी तस्दीक करता है।
शिकायत मिलने पर डीएम उत्तरकाशी ने पत्रांक संख्या 386 दिनांक 17 जुलाई 2017,भी वरिष्ठ कोषाधिकारी के मूल पत्र के साथ अपनी संस्तुति निदेशक कोषागार को भेज दी थी जिसमे बताया गया है कि उक्त कर्मी सुविधा शुल्क के एवज मे फ़ाइल मे आपत्ति लगाने का काम कर रहा है।
लेकिन इतनी भ्रष्ट करतूतों की शिकायतों के बावजूद इस अधिकारी को पुरोला कोषागार का प्रभारी बनाकर एक तरह से प्रोत्साहन देने का काम किया गया है ।
सूत्रों की मानें तो पर्वतजन मे खबर प्रसारित होने के बाद निदेशक कोषागार ने उत्तरकाशी जनपद से सभी शिकायत सबूत के तौर पर मंगाए हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि कम से कम मीडिया के दबाव मे ही सही आरोपी पर कार्यवाहों होगी ताकि अन्य लोक सेवक भी इससे सबक ले सकें।

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