तीन पदम पुरस्कारों की खुशी पर भारी, नरेंद्र सिंह नेगी पर मायूसी

जगदम्बा कोठारी/ रूद्रप्रयाग
उत्तराखंड से तीन शख्सियतों को पद्म पुरस्कारों का एलान होने के बाद से एक तरफ जहां प्रदेश भर मे खुशी का माहौल है वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड के सुप्रसिद्द लोक गायक गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी का नाम इसके लिए नामित न किये जाने से नाराज उनके प्रशंसकों ने उनके सर्मथन मे सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है।
शुक्रवार को उत्तराखंड से इस बार तीन शख्सियतों को पद्म पुरस्कार देने की घोषणा हुयी, जिनमे माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली महिला बछेन्द्री पाल, प्रसिद्द फोटोग्राफर अनूप शाह और जागर सम्राट के नाम से विख्यात प्रीतम भरतवाण शामिल हैं।
इससे पहले वर्ष 2017 मे देश-विदेश मेे अपनी आवाज से जागरों को पहचान दिलाने वाली लोक गायिका बसंती बिष्ट को भी यह सम्मान मिल चुका है। उत्तराखंडी लोक गायन मे बसंती बिष्ट के बाद जैंसे ही प्रीतम भरतवाण को पद्मश्री के लिए नामित किया गया तो तब से नरेंद्र सिंह नेगी के प्रशंसक सोशल मीडिया पर सरकार की जमकर आलोचना कर रहे हैं।

देश-विदेश से नेगी को भी पद्मश्री देने की मांग जोर पकड़ने लगी है, उनके प्रशंसक सोशल मीडिया मे सरकार को कोसते नजर आ रहे है। नेगी के कई सर्मथक तो आरोप लगा रहे हैं कि राजनीतिक कारणों से उनको पद्म पुरस्कार से वंचित रखा जा रहा है।हालांकि प्रीतम भरतवाण को ढोल सागर और जागर के सरंक्षण और उनको बढ़ावा देने के लिए पद्मश्री दिया जा रहा है, 2017 मे जागर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने दिलाने के लिए के कारण बसन्ती बिष्ट को पद्मश्री मिल चुका है ।


वरिष्ठ पत्रकार रमेश पहाड़ी कहते हैं कि नरेंद्र सिंह नेगी का नाम पद्म पुरस्कार के लिए शामिल न होने पर अधिसंख्य लोंगों को भारी आश्चर्य और निराशा हुई है। नरेंद्र भाई सामान्य गायक ही नहीं बल्कि वे पहाड़ की संस्कृति,सभ्यता,कला,समाज के प्रतिनिधि प्रवक्ता हैं और पिछले 35-40 वर्षों से इनको संरक्षित करने और आगे बढ़ाने मे जुटे है। गढ़वाली बोली को भाषा का दर्जा दिलाने की मांग को आगे बढ़ाने मे नेगी जी का सबसे बड़ा योगदान है।

लाखों मे है प्रशंसकों की फौज

चार दशक से अपने गीतों से उत्तराखंड के मुद्दों को उठाने एंव लोक संस्कृति की बात करने वाले नरेंद्र सिंह नेगी किसी परिचय के मौहताज नहीं है। वह अब तक चार दर्जन एलबमों मे लगभग हजार गीत लिख और गा चुके हैं, उनके तीन काव्य संग्रह भी प्रकाशित हो चुके हैं जिनमे ‘गाण्यों की गंगा स्याणियों का समोद्र’ खासा चर्चित रहा। उनके प्रशंसक और समर्थकों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 17 जून 2017 मे हार्ट अटैक आने पर मैक्स अस्पताल में भर्ती नेगी ने गूगल ट्रेंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पीछे छोड़ दिया था। करीब साढ़े तीन घंटे से अधिक समय तक दुनियाभर में लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी से ज्यादा नेगी का स्वास्थ्य जानने के लिए उन्हें गूगल पर सर्च किया। उस दिन नेगी दा टॉप 100 में ट्रेंड करते रहे।गूगल पर बड़ी संख्या में लोगों ने नेगी से जुड़े समाचार और सूचनाएं सर्च की।इस दौरान साढ़े तीन घंटे से अधिक समय तक गूगल पर नेगी दा को प्रधानमंत्री मोदी से ज्यादा सर्च किया गया। उस दिन 7.30 बजे नेगी ने गूगल ट्रेंड में मोदी को पीछे छोड़ दिया था।सुबह 11.06 बजे तक वह मोदी से आगे चलते रहे।
यदि समय रहते सरकार ने नरेंद्र सिंह नेगी के समर्थकों की यह मांग पूरी नहीं की तो जाहिर है उनके प्रशंसकों की यह फौज सरकार के लिए सिरदर्द बन सकती है।

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