नैनीताल में होटलों के 30% कमरे खाली, फिर भी पर्यटकों को लौटाया जा रहा वापस

कमल जगाती

नैनीताल। उत्तराखण्ड में विश्वविख्यात पर्यटन नगरी नैनीताल को पीछे धकेलने का काम जिला प्रशासन और नैनीताल पुलिस कर रही है। यहां मुख्य सीजन में ठण्डे मौसम के बावजूद होटलों के तीस से चालीस प्रतिशत कमरे खाली होना और पर्यटन व्यवसाय हल्का होना राज्य की अर्थव्यवस्था और मुख्य रोजगार पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
ग्रीष्मकालीन सीजन के दौरान देशभर से पर्यटक नैनीताल और दूसरे पर्यटन स्थल पहुंचते हैं। यहां मैदानों की चिलचिलाती धूप/गर्मी से बचने के लिए लाखों की संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। पर्यटक मैदानों के जला देने वाले 50 डिग्री के सामने महज 20 डिग्री तापमान का जमकर आनंद उठाते हैं। बच्चों के साथ यहां पहुंचे पर्यटकों को पिछले कुछ दिनों में वाहन समेत नैनीताल आने नहीं दिया गया था। पर्यटकों को नैनीताल से दस किलोमीटर दूर रोककर वाहन खड़े करने को मजबूर कर दिया गया। सैलानी वहां से बमुष्किल टैक्सियों के माध्यम से यहां पहुंचे। कई वाहनों को पुलिस ने डाइवर्ट कर घण्टों तक घुमा दिया। बताया जा रहा है कि इस व्यवस्था से परेशान होकर पर्यटक वापस लौट गए।
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इतना ही नहीं नैनीताल में पर्यटकों के अत्यधिक कम संख्या में पहुंचने से यहां के होटल भी खाली रह गए। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े कई व्यापारी इन व्यवस्थाओं से त्रस्त हो गए। उन्होंने जिला प्रशासन और नैनीताल पुलिस की इस दमनकारी व्यवस्था का मीटिंग कर विरोध किया और अधिकारियों से मुलाकात की। उत्तराखण्ड को सबसे ज्यादा रोजगार और इसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले इस उद्योग को इन निरंकुश अधिकारियों ने बिगाड़ने के प्रयास किया है।

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