मामचन्द शाह
उत्तराखंड कोऑपरेटिव बैंक की भर्ती परीक्षा का सेंटर राज्य से बाहर बनाए जाने पर उत्तराखंड के बेरोजगारों में भारी आक्रोश है। जगह-जगह तमाम बेरोजगार संगठन इस परीक्षा को राज्य से बाहर कराए जाने का विरोध कर रहे हैं।
उत्तराखंड बेरोजगार संघ व गढ़ सेना के कार्यकर्ताओं ने बेरोजगारों के साथ मिलकर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राज्यपाल, सहकारिता मंत्री और सहकारी बैंक को ज्ञापन प्रेषित किया है कि जब परीक्षा फार्म में उत्तराखंड में सेंटर उल्लिखित हैं तो पेपर भी उन्हीं सेंटरों में होने चाहिए। बेरोजगार युवाओं का आरोप है कि जिस समय ऑनलाइन परीक्षा फार्म भरा गया था, उस समय देहरादून के साथ ही प्रदेश में कुल 10 सेंटर भरे गए थे, लेकिन अब एडमिट कार्ड में राज्य से बाहर जैसे नोएडा, लखनऊ, अजमेर, गाजियाबाद, मेरठ आदि शहरों में परीक्षा सेंटर बनाए गए हैं। ऐसे में उत्तराखंड के बेरोजगार अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
बेरोजगार मनीष व्यास कहते हैं कि उनका सेंटर नोएडा में है। इस परीक्षा में केवल वही लोग शामिल हो सकते हैं, जो मैदानी क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि पहाड़ के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले गरीब बेरोजगारों को बड़े-बड़े शहरों में परीक्षा देने जाने में भारी परेशानियां हो सकती हैं। एक तो उनका अत्यधिक खर्च होगा, वहीं उन्हें परीक्षा केंद्र ढूंढने में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। फलस्वरूप ऐसे अभ्यर्थियों को पेपर छोडऩे के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पंवार व गढ़ सेना के संस्थापक सचिन थपलियाल का कहना है कि इस तरह राज्य के बेरोजगारों के साथ खिलवाड़ किया जाना दर्शाता है कि उत्तराखंड सरकार को बेरोजगारों की कोई चिंता नहीं है। परीक्षा आगामी १७ जून को होनी है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो हजारों अभ्यर्थी परीक्षा देने से वंचित रह जाएंगे।
सहकारी समिति के निबंधक बाल मयंक मिश्रा बताते हैं कि विभागीय मंत्री का सख्त निर्देश था कि इस बार ईमानदारी व पारदर्शिता से परीक्षा संपन्न हो। लगभग ५७ हजार अभ्यर्थियों ने परीक्षा फार्म भरा है, लेकिन यहां संसाधन पूरे न होने के चलते कुछ अभ्यर्थियों का सेंटर बाहर बनाया गया है।
सचिव सहकारिता आर. मीनाक्षी सुंदरम से जब इस संबंध में पूछा गया तो उनका साफ कहना था कि पहली बार लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि इस परीक्षा में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और कोई धांधली न हो सके। राष्ट्रीयकृत बैंक की मुंबई बेस्ड एजेंसी आईबीपीएस से इस भर्ती परीक्षा को कराया जा रहा है। कंप्यूटर से एक्जाम होगा, लेकिन प्रदेश में सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा कराई जानी संभव नहीं हो पा रही है। अभी तक पिछली भर्तियों का रिकार्ड रहा है कि वह कभी भी नीट एंड क्लीन नहीं हो पाई। यही कारण है कि कुछ अभ्यर्थियों का सेंटर प्रदेश से बाहर बनाया गया है।

बताते चलें कि सहकारिता मंत्री डा. धन सिंह रावत उत्तराखंड के बेरोजगारों की बात करते रहते हैं। अब बेरोजगारों को नौकरी देने की बारी आई तो मंत्री जी ने बेरोजगारों की अनदेखी करते हुए परीक्षा केंद्र ही राज्य से बाहर करवा दिया। अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि मंत्री धन सिंह रावत को उन्हें रोजगार उपलब्ध करवाने की चिंता होती तो वह ऐसे तमाम पारदर्शी इंतजाम प्रदेश में ही करवा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा करना जरूरी नहीं समझा और व्यवस्थाओं का हवाला दे दिया। ऐसे में बेरोजगारों में उनके प्रति खासी नाराजगी देखी जा रही है।
सवाल यह है कि जिस पारदर्शिता का हवाला देकर परीक्षा बाहर कराई जा रही है, उस पारदर्शिता का इंतजाम उत्तराखंड में ही क्यों नहीं कर दिया गया। यहां तमाम बड़े-बड़े संस्थान हैं। पर्याप्त समय होने के चलते उन सभी व्यवस्थाओं को इन्हीं में कराया जा सकता था, लेकिन हजारों गरीब बेरोजगारों को नजरअंदाज करते हुए परीक्षा केंद्र दूर-दूर के शहरों में बना दिए गए, लेकिन बेरोजगारों को अन्यत्र परीक्षा कराए जाने के पीछे का तर्क हजम नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा बाहरी राज्यों में कराई जानी थी तो फार्म में इसका स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए था।
जाहिर है कि आर्थिक से रूप से कमजोर अभ्यर्थियों का पेपर छूटना लगभग तय है। अब देखना है कि 9 दिन पूर्व सहकारिता विभाग इस मामले पर कोई विचार करता है या फिर बेरोजगारों की सुविधा को नजरअंदाज करते हुए अपनी मनमानी जारी रखता है।
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