स्टिंग कांड में उमेश को राहत। सुनिए संजय गुप्ता और राहुल भाटिया की बातचीत

कृष्णा बिष्ट 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के करीबियों के स्टिंग प्रकरण में समाचार प्लस के सीईओ उमेश कुमार को राहत मिल गई है।

उन पर ब्लैक मेलिंग एक्सटॉर्शन और राजद्रोह के आरोप साबित नहीं हो सके। ब्लैक मेलिंग का आरोप तो उत्तराखंड पुलिस ने अपनी चार्जशीट में से भी हटा दिया है।

मुख्यमंत्री के करीबी संजय गुप्ता की एक बातचीत इस स्टिंग प्रकरण में से अभियुक्त बनाए गए राहुल भाटिया के साथ लीक हुई है।

सुनिए आॅडियो

https://youtu.be/5BVVMiv29Cs

इस बातचीत में यह साफ सुना जा सकता है कि राहुल भाटिया को तोड़ने और मनाने के लिए उसे कई तरह के प्रलोभन दिए जा रहे थे और साथ ही बताया जा रहा है कि पंडित आयुष को भी सरकार ने सुरक्षा और पैसे उपलब्ध करा दिए हैं।

इस ऑडियो में संजय गुप्ता कहते हुए सुने जा सकते हैं कि “आयुष सरकार से मिल गए हैं और इसका सभी खर्चा सरकार उठा रही है, इसलिए तुम भी सरकारी गवाह बन जाओ ताकि हम तुम्हें भी सुरक्षा दिला सकें।” संजय गुप्ता कह रहे हैं कि इस मामले में मुख्यमंत्री से भी बातचीत हो गई है

हालांकि इस टेप को लेकर आयुष गौड़ का कहना है कि यह बातचीत संजय गुप्ता और राहुल भाटिया के बीच की है, इसमें उनकी ना तो कोई आवाज है और ना ही उनका इस प्रकरण से कोई लेना देना है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के सभी करीबी पहले कह रहे थे कि उनका कोई स्टिंग नहीं हुआ है लेकिन जब स्टिंग के 22 डीवीडी उत्तराखंड हाई कोर्ट में जमा हो गए तो लगभग सभी ने यह स्वीकार कर लिया कि उनका स्टिंग हुआ था और वे स्टिंग करने वालों से विभिन्न जगहों पर मिले थे।

धीरेंद्र पवार ने भी यह स्वीकार किया है कि वे दो बार संजय गुप्ता के साथ आयुष से मिले थे और सीएम के भाई विरेंद्र रावत ने तो पहले हाई कोर्ट में हलफनामा तक दे दिया था कि वह कभी उमेश कुमार या उसके प्रतिनिधि से नहीं मिले लेकिन जैसे ही कोर्ट में स्टिंग की डीवीडी जमा हुई तो उन्होंने आयुष गौड़  से मिलने की बात स्वीकार कर ली।

संजय गुप्ता ने भी इस बात को स्वीकार किया कि उन्होंने अपने अकाउंट में पैसे लिए थे साथ ही सीएम के भतीजे अरविंद रावत ने भी आयुष गौड़ से मिलने की बात कबूली।

हालांकि संजय गुप्ता ने यह जरूर कहा कि उन्होंने पैसे जमीन के एवज में लिए थे जो सौदा असफल हो जाने पर वापस कर दिए गए थे।

प्रकरण में ब्लैक मेलिंग के सबूत नहीं मिलने पर भले ही पुलिस ने ब्लैकमेलिंग की की दो धाराएं हटा दी हैं, अब केवल आरोपियों पर जान का भय दिखाना और वसूली करने का ही मुकदमा चलेगा।  हालांकि इन धाराओं के अंतर्गत भी पुलिस के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

इस पूरे प्रकरण में पुलिस और अभियोजन अधिकारी सरकार की काफी किरकिरी करा चुके हैं। उमेश शर्मा का कहना है कि उन्हें कोर्ट से न्याय की पूरी उम्मीद है और वह इस लड़ाई को अंतिम सिरे तक लडेंगे।

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