Uttarakhand News: पुल बहने से 18 गांवों की जिंदगी ठप, 4 साल से इंतजार में ग्रामीण—अब आंदोलन की चेतावनी

नीरज उत्तराखंडी/पुरोला (उत्तरकाशी), 2026।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पुरोला क्षेत्र में मालगाड़ नदी पर बना आरसीसी पुल बीते चार वर्षों से ध्वस्त पड़ा है, जिससे करीब 18 गांवों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

यह पुल क्षेत्र के लोगों के लिए जीवनरेखा माना जाता था, लेकिन 2021 से 2023 के बीच आई आपदाओं में इसके बह जाने के बाद से ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

नगर पालिका क्षेत्र सहित कमल सिरांई और जैसाण थोक के गांवों को जोड़ने वाला यह पुल खलाड़ी, शरमाली, आराकोट, पुजेली, चपटाड़ी, नेत्री, सल्ला और चालनी जैसे कई गांवों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग था।

पुल टूटने के कारण अब न सिर्फ आम आवाजाही बाधित हुई है, बल्कि बच्चों की शिक्षा, मरीजों की अस्पताल तक पहुंच और लोगों की बाजार तक पहुंच भी बेहद कठिन हो गई है।

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बरसात में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर

ग्रामीणों के अनुसार, सबसे ज्यादा दिक्कत बरसात के मौसम में होती है, जब मालगाड़ नदी उफान पर होती है। ऐसे समय में नदी पार करना जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है। कई बार लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है या फिर लंबा और कठिन वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है।

श्मशान घाट तक पहुंचना भी बना बड़ी चुनौती

पुल के ध्वस्त होने के बाद श्मशान घाट तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। पहले जहां लोग सीधे पुल के जरिए घाट तक पहुंच जाते थे, अब उन्हें करीब दो किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे परिजनों को मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन से बार-बार मांग के बावजूद नहीं हुआ समाधान

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लिखित और मौखिक रूप से पुल निर्माण की मांग सौंपी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। हाल ही में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द आरसीसी पुल के निर्माण की मांग दोहराई है।

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ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय लोगों में प्रशासन की धीमी कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि जल्द ही पुल निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

इस दौरान बलदेव रावत, स्यालिक राम नौटियाल, हकूमत रावत, अमीन सिंह, जगमोहन सिंह, धीरपाल रावत, फकीर चंद, मनोज रतूड़ी और सरदार सिंह सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।

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