रिपोर्ट – नीरज उत्तराखंडी / त्यूणी देहरादून 27 मार्च 2026
तहसील त्यूणी के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस की किल्लत अब गंभीर रूप लेती जा रही है। सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति ठप होने से हजारों ग्रामीण परिवारों को मजबूरन फिर से पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है।
इससे न केवल उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है, बल्कि महिलाओं और बुजुर्गों को धुएं और लकड़ी की व्यवस्था जैसी अतिरिक्त समस्याओं का सामना भी करना पड़ रहा है।
5200 उपभोक्ता, लेकिन आपूर्ति ठप
त्यूणी स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम की इंडेन गैस एजेंसी से करीब 5200 घरेलू उपभोक्ता जुड़े हैं, जबकि व्यावसायिक कनेक्शन बहुत कम हैं। बावजूद इसके, ग्रामीणों का आरोप है कि गैस की आपूर्ति गांवों तक नहीं पहुंच रही है।
शुरुआत में व्यवस्था सुचारु रही, लेकिन अब 45 दिन की अनिवार्य बुकिंग अवधि और डीएसी नंबर की बाध्यता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
वर्तमान में सिलेंडरों का वितरण केवल त्यूणी स्थित गोदाम से ही किया जा रहा है, जिससे 50-60 किलोमीटर दूर बसे गांवों के लोगों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
गांवों में नहीं, बाजार में आसानी से मिल रही गैस
ग्रामीण उपभोक्ताओं—सुरेंद्र, बबली, , अजब सिंह, प्रताप सिंह, इंद्र, पातीराम, दीवान सिंह और रविंद्र—ने आरोप लगाया कि एजेंसी गांवों में आपूर्ति नहीं कर रही, जबकि त्यूणी बाजार में होटल और ढाबा संचालकों को आसानी से सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि घरेलू गैस कनेक्शनों का उपयोग व्यावसायिक कार्यों में किया जा रहा है, जिससे असली जरूरतमंदों को समय पर गैस नहीं मिल पा रही।
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महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर
गैस संकट का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ रहा है। चूल्हे के धुएं से आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
साथ ही, जंगलों से लकड़ी लाने की मजबूरी ने उनकी मेहनत और समय दोनों बढ़ा दिए हैं।
सप्लाई बहाल करने की मांग तेज
समाजसेवी सुरेंद्र बिजल्वान, रमेश चौहान और लायक राम शर्मा ने एजेंसी प्रबंधन से ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द गैस आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ सकता है।
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एजेंसी का पक्ष
इंडेन गैस एजेंसी के प्रबंधक अजय गुसाईं का कहना है कि फिलहाल वितरण गोदाम से ही किया जा रहा है, लेकिन जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई चरणबद्ध तरीके से बहाल की जाएगी।
बहरहाल त्यूणी क्षेत्र में गैस संकट केवल आपूर्ति की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
