देहरादून | उत्तराखंड
उत्तराखंड सरकार ने अवैध खनन और खनिज परिवहन पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सभी खनन वाहनों में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) प्रणाली लागू की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत वाहन चालकों को गेट पर दस्तावेज दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी और RFID रीडर स्वतः वाहन से जुड़ी सभी जानकारी पढ़ लेगा।
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के अनुसार इस नई तकनीक से समय की बचत, वाहनों की लंबी कतारों से राहत और खनिज परिवहन की निगरानी अधिक पारदर्शी होगी।
55 हजार खनन वाहनों पर लागू होगी व्यवस्था
राज्य में वर्तमान में लगभग 55 हजार खनन वाहन पंजीकृत हैं, जिनके माध्यम से खनिज ढुलान किया जाता है। इसके अलावा अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में वाहन उत्तराखंड में खनिज परिवहन के लिए आते हैं।
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के निदेशक राजपाल लेघा ने बताया कि विभाग ने विभिन्न स्थानों पर जांच गेट स्थापित किए हैं, जहां अभी तक वाहनों के प्रपत्रों की मैनुअल जांच की जाती है। अब इन गेटों पर RFID रीडर लगाए जाएंगे।
कैसे काम करेगा RFID सिस्टम?
RFID एक विशेष इलेक्ट्रॉनिक चिप आधारित तकनीक है, जिसमें वाहन से संबंधित सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं दर्ज रहेंगी। जैसे ही RFID लगा वाहन जांच गेट पर पहुंचेगा, वहां लगा RFID रीडर स्वतः वाहन की जानकारी स्कैन कर लेगा। इससे तुरंत पता चल सकेगा कि: वाहन पंजीकृत है या नहीं, उसमें कौन-सा खनिज लदा है, संबंधित खनिज की रॉयल्टी जमा की गई है या नहीं, ई-रवन्ना वैध है या नहीं। यदि किसी वाहन में रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया गया होगा, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
रूट पर भी होगी RFID से जांच
सरकार केवल गेटों तक ही यह व्यवस्था सीमित नहीं रखेगी। विभाग ने मार्गों पर चलती जांच व्यवस्था भी तैयार की है।
इसके लिए अधिकारियों को हैंडहेल्ड RFID रीडर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनकी मदद से सड़क पर चलते वाहनों की भी जांच की जा सकेगी। इससे अवैध खनिज परिवहन करने वाले वाहनों पर निगरानी और सख्त हो जाएगी।
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने स्पष्ट किया है कि अन्य राज्यों से उत्तराखंड में आने वाले खनन वाहनों को भी RFID लगाना अनिवार्य होगा।
जिन वाहनों में RFID नहीं लगा होगा, उन्हें ई-रवन्ना जारी नहीं किया जाएगा। विभाग ने सभी संबंधित वाहन मालिकों और ऑपरेटरों को 15 सितंबर 2026 तक RFID लगवाने की समय सीमा दी है।
अवैध खनन रोकने में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि RFID आधारित निगरानी प्रणाली लागू होने से: फर्जी प्रपत्रों का उपयोग कम होगा, रॉयल्टी चोरी पर रोक लगेगी, खनिज परिवहन का रियल टाइम रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, विभागीय जांच अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी। यह कदम राज्य में लंबे समय से चल रही अवैध खनन और अवैध परिवहन की शिकायतों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निदेशक राजपाल लेघा के अनुसार, नई RFID व्यवस्था लागू होने के बाद गेटों पर वाहनों की भीड़ कम होगी और खनिज परिवहन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और स्वचालित बनाया जा सकेगा।
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