देहरादून/हल्द्वानी। कार्तिक उपाध्याय
उत्तराखंड कृषि विभाग से सूचना के अधिकार के तहत निकले सरकारी दस्तावेजों ने करोड़ों रुपये के भुगतान और वसूली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसान मंच उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष किसानपुत्र कार्तिक उपाध्याय द्वारा RTI के जरिए हासिल किए गए अभिलेखों में एक तरफ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अपात्र लाभार्थियों को ₹1152.46 लाख दिए जाने और ₹1147.86 लाख की वसूली लंबित होने का उल्लेख है, वहीं दूसरी तरफ तीन संस्थाओं को किए गए ₹1444.98 लाख के भुगतान पर लेखा परीक्षा की आपत्ति सामने आई है।
PM-KISAN: ₹1152.46 लाख अपात्र लाभार्थियों तक कैसे पहुंचे?
कृषि निदेशालय के उपलब्ध दस्तावेज में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में सत्यापन संबंधी कार्रवाई का जिक्र करते हुए ₹1152.46 लाख अपात्र लाभार्थियों को प्रदान किए जाने की बात दर्ज है। यह राशि करीब ₹11 करोड़ 52 लाख 46 हजार होती है।
इसी अभिलेख में वर्तमान तक ₹1147.86 लाख की वसूली लंबित रहने का उल्लेख है। यानी करीब ₹11 करोड़ 47 लाख 86 हजार की वसूली बाकी बताई गई है।
दोनों रकम के बीच महज ₹4.60 लाख का अंतर है। दस्तावेजों में सामने आए ये आंकड़े इसलिए भी सवाल खड़े करते हैं क्योंकि PM-KISAN की Operational Guidelines के संदर्भ में राज्य सरकार की जिम्मेदारियों में लाभार्थियों की पहचान, उनका विवरण योजना के पोर्टल पर अपलोड करने और लाभार्थियों के विवरण की शुद्धता सुनिश्चित करने जैसी जिम्मेदारियों का उल्लेख है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सत्यापन की व्यवस्था होने के बावजूद इतनी बड़ी रकम अपात्र लाभार्थियों तक कैसे पहुंची और करोड़ों रुपये की वसूली लंबित क्यों रही?
Unique ID नहीं, फिर भी तीन संस्थाओं को निधि?
RTI से सामने आया दूसरा दस्तावेज और भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। इसमें लेखा परीक्षा द्वारा आपत्ति किए जाने और विभाग से उपलब्ध कराई गई Unique ID की पोर्टल पर जांच किए जाने का उल्लेख है।
अभिलेख में SIMFED, Sheel Biotech Ltd. और Shri Ram Solvent Extraction Pvt. Ltd. के नाम दर्ज हैं।
दस्तावेज के अनुसार इन संस्थाओं की Unique ID नहीं थी, बावजूद इसके विभाग द्वारा निधि प्रदान की गई, जिसे उपलब्ध अभिलेख में भारत सरकार के शासनादेश के विरुद्ध बताया गया है।
इसी प्रकरण में दस्तावेज में ₹1444.98 लाख, यानी करीब ₹14 करोड़ 44 लाख 98 हजार की राशि का उल्लेख है। अभिलेख में इस भुगतान से जुड़े मामले को शासन के संज्ञान में लाए जाने की बात भी दर्ज है।
किसान मंच बोला—यह शुरुआत है, कृषि-उद्यान की फाइलें खुलेंगी
किसान मंच उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष किसानपुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि ये दस्तावेज केवल शुरुआत हैं। किसान मंच अब कृषि और उद्यान विभाग में योजनाओं, खरीद, अनुदान, संस्थाओं को हुए भुगतान और ऑडिट आपत्तियों से जुड़े अभिलेखों की परत-दर-परत पड़ताल करेगा।
किसानपुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा, “किसानों के नाम पर जारी सरकारी धन का एक-एक रुपये का हिसाब सामने आना चाहिए। RTI से जो दस्तावेज मिल रहे हैं, वे गंभीर सवाल उठा रहे हैं। किसान मंच कृषि और उद्यान विभाग में करोड़ों रुपये से जुड़े कथित घोटालों और अनियमितताओं का दस्तावेजों के साथ पर्दाफाश करेगा।”
उन्होंने सवाल उठाया कि अपात्र लाभार्थियों को ₹1152.46 लाख का भुगतान होने के लिए जिम्मेदार कौन है? ₹1147.86 लाख की वसूली अब तक लंबित क्यों है? जिन तीन संस्थाओं की Unique ID नहीं होने का उल्लेख दस्तावेज में है, उन्हें भुगतान किसकी स्वीकृति से किया गया और ऑडिट आपत्ति के बाद किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय हुई?
किसानपुत्र कार्तिक उपाध्याय के मुताबिक अगले चरण में संबंधित भुगतान आदेश, स्वीकृतियां, शासनादेश, ऑडिट को दिए गए विभागीय जवाब और आपत्ति के बाद हुई कार्रवाई के दस्तावेज भी RTI के जरिए जुटाए जाएंगे।
नोट: खबर में दिए गए आंकड़े और ऑडिट संबंधी तथ्य RTI से प्राप्त उपलब्ध सरकारी अभिलेखों पर आधारित हैं। ऑडिट आपत्ति अथवा कथित अनियमितता को अंतिम रूप से सिद्ध घोटाला नहीं माना गया है। संबंधित विभाग, अधिकारियों और संस्थाओं का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना उचित होगा।


