नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र से भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 400 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 300 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें 142 भारतीयों की भी तलाश जारी है। भीषण बाढ़ के चलते कई पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं, घरों को नुकसान पहुंचा और कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
अचानक बढ़ा नदी का जलस्तर, मची भारी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया। तेज बहाव अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर आया, जिससे नदी के आसपास के इलाकों में भारी नुकसान हुआ। बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई क्षेत्रों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।
आपदा का सबसे ज्यादा असर रसुवा और धादिंग जिलों में देखने को मिला है। इसके अलावा नुवाकोट, चितवन और नवलपरासी ईस्ट समेत कई अन्य जिले भी बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हुए हैं।
ग्लेशियर टूटने से बनी अस्थायी झील, फिर अचानक फटा बांध
नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विभाग के अधिकारियों ने शुरुआती जांच में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के पीछे ग्लेशियर टूटने की आशंका जताई है। अधिकारियों के अनुसार, ग्लेशियर से निकले मलबे ने नदी का रास्ता रोक दिया, जिससे वहां एक अस्थायी झील बन गई। बाद में यह झील अचानक टूट गई और बड़ी मात्रा में पानी तेजी से नीचे की ओर बहने लगा।
बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के प्रमुख बिनोद पराजुली के मुताबिक, चीनी अधिकारियों से मिली शुरुआती सैटेलाइट तस्वीरों में नदी से करीब 20 किलोमीटर ऊपर मलबा जमा होने की जानकारी सामने आई है। इसी मलबे के कारण अस्थायी झील बनने की आशंका जताई गई है।
पुल और सड़कें तबाह, हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान
भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई पुल तेज बहाव में बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए। सड़कों पर मलबा जमा होने से आवागमन बाधित हुआ है। कई घरों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव दलों को भेजा गया है। सुरक्षाकर्मी और आपदा प्रतिक्रिया टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। सरकार प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही भोजन, चिकित्सा और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटी है।
142 भारतीयों की भी तलाश जारी
नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने की सूचना है। इनमें 142 भारतीय नागरिकों के भी लापता होने की बात सामने आई है। उनकी तलाश के लिए स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव एजेंसियां अभियान चला रही हैं।
भारत की ओर से भी नेपाल को सहायता उपलब्ध कराने की पहल की गई है। राहत सामग्री और मेडिकल सहायता भेजने के साथ बचाव एवं राहत कार्यों में सहयोग किया जा रहा है।
अमेरिका ने दी 5 लाख डॉलर की आपात सहायता
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद अमेरिका ने 5 लाख डॉलर की आपात सहायता देने की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह सहायता नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान को मजबूत करने के लिए दी जाएगी। अमेरिका प्रभावित क्षेत्र में एक आपदा प्रतिक्रिया सलाहकार भी भेजेगा, जो राहत कार्यों में सहयोग करेगा।
संयुक्त राष्ट्र ने जताया दुख
नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा पर संयुक्त राष्ट्र ने भी दुख जताया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बाढ़ में हुई जान-माल की क्षति पर संवेदना व्यक्त की है।
महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र नेपाल सरकार के नेतृत्व में चलाए जा रहे राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग कर रहा है। प्रभावित लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच भारत ने भी सहायता का हाथ बढ़ाया है। भारत की ओर से राहत सामग्री और मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने के साथ बचाव अभियान में भी सहयोग किया जा रहा है। दोनों देशों की एजेंसियां प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण मृतकों और प्रभावितों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।


