- यमुनोत्री धाम के निकट गरुड़ गंगा पर बन रहा लोहे के गाडर का पुल निर्माण पूरा होने से पहले ही क्षतिग्रस्त — भूमि चयन, निर्माण मानकों और गुणवत्ता पर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी
बड़कोट/उत्तरकाशी, 27 अगस्त 2026। यमुनोत्री धाम की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से गरुड़ गंगा पर करीब 90 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन लोहे के गाडर के पैदल पुल के पिलर पहली ही बरसात में क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पुल का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है और उससे पहले ही दोनों ओर बनाए गए पिलरों को नुकसान पहुंचने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता, मानकों और भूमि चयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
गरुड़ गंगा पर बनाया जा रहा यह पैदल पुल यमुनोत्री धाम और नवनिर्मित हेलिपैड को जोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्षेत्र में करीब 60 लाख रुपये की लागत से हेलिपैड का निर्माण किया गया है, जबकि गरुड़ गंगा से यमुनोत्री मंदिर तक करीब 35 लाख रुपये की लागत से पैदल मार्ग का निर्माण भी किया जा रहा है। ऐसे में पुल के निर्माण से यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने की योजना है।
लेकिन निर्माणाधीन पुल के पिलर क्षतिग्रस्त होने से पूरी परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के दौरान ही यदि पुल के पिलर पानी के दबाव को नहीं झेल पा रहे हैं तो भविष्य में यात्रियों के आवागमन के दौरान इसकी सुरक्षा और मजबूती को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों ने उठाए नींव की गुणवत्ता पर सवाल
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पिलर की नींव को पर्याप्त गहराई तक खोदने के बजाय हल्की खुदाई कर पत्थरों के ऊपर ही निर्माण किए जाने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि नींव में मजबूती के मानकों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया और पत्थरों पर सीमेंट की लीपापोती कर संरचना तैयार की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक तकनीकी जांच अभी सामने नहीं आई है।
पहली बरसात में ही पिलर के क्षतिग्रस्त होने की घटना ने निर्माण की निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए किए जा रहे निर्माण कार्यों में केवल निर्माण पूरा करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी दीर्घकालिक सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
पानी बढ़ने से नुकसान होने की बात
कार्यदायी एजेंसी ब्रिडकुल के साइड इंचार्ज सचिन राठौर ने बताया कि गरुड़ गंगा में पानी बढ़ने के कारण पिलर क्षतिग्रस्त हुआ है। उन्होंने कहा कि जल्द ही आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य करवाए जाएंगे।
अब सवाल यह है कि यदि नदी में पानी बढ़ना संभावित और सामान्य प्राकृतिक परिस्थिति है, तो क्या पुल के पिलरों का डिजाइन और नींव नदी के संभावित जलस्तर और बहाव को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पुल यात्रियों की आवाजाही के लिए बनाया जा रहा है।
तकनीकी जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने निर्माणाधीन पुल के क्षतिग्रस्त पिलर की तकनीकी जांच कराने, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच करने तथा नींव की मजबूती और भूमि चयन का स्वतंत्र परीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सुरक्षात्मक कार्य कर क्षति को छिपाने के बजाय पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पिलर आखिर क्षतिग्रस्त क्यों हुआ।
यमुनोत्री जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण तीर्थस्थल पर निर्माणाधीन किसी भी सार्वजनिक सुविधा की गुणवत्ता से समझौता यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे में संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी है कि पुल के निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहे सवालों का तकनीकी जांच के माध्यम से स्पष्ट जवाब दें।


