- दर्जनों गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल, मामूली इलाज के लिए भी ग्रामीणों को तय करनी पड़ रही 50 से 60 किमी की दूरी
त्यूनी, 04 सितंबर 2026। नीरज उत्तराखंडी
जौनसार-बावर क्षेत्र के कथियान स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भटाड़-कथियान में लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल बनी हुई हैं। क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लिए महत्वपूर्ण इस स्वास्थ्य केंद्र में न तो चिकित्सक तैनात है और न ही फार्मासिस्ट। वर्तमान में स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं एक वार्ड ब्वॉय के भरोसे संचालित होने की स्थिति में हैं। स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा की इस बदहाली को लेकर ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2015-16 में स्वास्थ्य केंद्र में तैनात फार्मासिस्ट की मृत्यु के बाद से आज तक यहां फार्मासिस्ट की स्थायी तैनाती नहीं हो सकी है। वहीं चिकित्सा अधिकारी यानी डॉक्टर का पद भी लंबे समय से रिक्त पड़ा हुआ है। डॉक्टर और फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में स्वास्थ्य केंद्र का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है और क्षेत्र की बड़ी आबादी को प्राथमिक उपचार जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी दूसरे क्षेत्रों का रुख करना पड़ रहा है।
दर्जनों गांवों के लिए महत्वपूर्ण है स्वास्थ्य केंद्र
कथियान और आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भटाड़-कथियान महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी या आकस्मिक स्वास्थ्य समस्या होने पर वे इसी केंद्र से प्राथमिक उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन यहां चिकित्सक और फार्मासिस्ट नहीं मिलने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।
स्थिति यह है कि छोटी-मोटी बीमारी के उपचार के लिए भी ग्रामीणों को करीब 50 से 60 किलोमीटर दूर त्यूनी अथवा अन्य स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त समय तो गंवाना ही पड़ता है, साथ ही आने-जाने और उपचार का आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है। आपात स्थिति में लंबी दूरी तय करना मरीजों के लिए और भी परेशानी का कारण बन सकता है।
2015-16 के बाद नहीं हुई फार्मासिस्ट की स्थायी तैनाती
क्षेत्र पंचायत सदस्य डिरनाड-भटाड़ हरपाल चौहान, ग्रामीण राजू, देबू, लालबहादुर, वीरेंद्र शर्मा, मेजर सिंह शर्मा, हरिमोहन शर्मा, ग्राम प्रधान भटाड़ लक्ष्मण सिंह तथा क्षेत्र पंचायत सदस्य भुनाड़ उषा रावत सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2015-16 के बाद से स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और फार्मासिस्ट की नियमित तैनाती नहीं की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से समस्या सामने होने के बावजूद इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया। उनका आरोप है कि सरकार पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इन दावों के विपरीत नजर आती है। उनका कहना है कि डॉक्टर और फार्मासिस्ट जैसे आवश्यक पदों का लंबे समय तक रिक्त रहना दूरस्थ क्षेत्र की जनता के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर उदासीनता को दर्शाता है।
2022 से पहले से खाली है डॉक्टर का पद : प्रभारी चिकित्साधिकारी
प्रभारी चिकित्साधिकारी चकराता डॉ. विपिन तोमर ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भटाड़ में डॉक्टर का पद वर्ष 2022 से पहले से ही रिक्त है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में निदेशालय को कई बार अवगत कराया गया है तथा स्थायी डॉक्टर की मांग की गई है।
सीएमओ ने भी माना, डॉक्टर और फार्मासिस्ट की कमी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी देहरादून डॉ. मनोज शर्मा ने भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भटाड़-कथियान में लंबे समय से चिकित्सक और फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मामला विभाग के संज्ञान में है और केंद्र में चिकित्सक एवं फार्मासिस्ट की व्यवस्था किया जाना आवश्यक है।
सीएमओ के अनुसार चिकित्सकों और फार्मासिस्टों की उपलब्धता नहीं होने के कारण अभी तक तैनाती नहीं हो सकी है। चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन स्तर पर कई बार प्रयास किए गए हैं और विभाग की ओर से मांग भी भेजी गई है। उन्होंने कहा कि जब भी विभाग को चिकित्सक उपलब्ध होंगे, प्राथमिकता के आधार पर भटाड़-कथियान स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक की तैनाती की जाएगी।
ग्रामीणों ने तत्काल तैनाती की उठाई मांग
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जौनसार-बावर जैसे दुर्गम और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र की परिस्थितियों को देखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भटाड़-कथियान में डॉक्टर और फार्मासिस्ट की जल्द से जल्द स्थायी तैनाती की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होने से आसपास के दर्जनों गांवों की जनता को प्राथमिक उपचार के लिए 50-60 किलोमीटर दूर जाने की मजबूरी से राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना केवल सरकारी घोषणा का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीणों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक जिम्मेदारी है।


