त्रिवेंद्र के एक और तीर से चित अजय भट्ट!

मुख्यमंत्री  त्रिवेंद्र सिंह रावत और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के बीच कई मुद्दों पर मतभिन्नता ही देखने को नहीं मिली, बल्कि कई बार अब दोनों नेता एक दूसरे की कही बातों को भी सिरे से खारिज करने में भी नहीं चूक रहे हैं।


राजनैतिक प्रतिद्वंदिता के बीच नया घटनाक्रम 4 मार्च 2018 को देहरादून में भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ऐलान किया कि उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार पांच वर्ष के लिए नहीं, बल्कि १५ वर्ष के लिए बनी है और वे इस प्रकार काम करेंगे कि उत्तराखंड की जनता पांच साल भाजपा पांच साल कांग्रेस वाले ट्रेंड को तोड़ देगी। जिस वक्त त्रिवेंद्र सिंह रावत यह ऐलान कर रहे थे, उनके बगल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट भी बैठे थे।
ज्ञात रहे कि जिस विधानसभा रानीखेत से अजय भट्ट चुनाव लड़ते हैं, उत्तराखंड गठन के बाद उस सीट पर जीतने वाले प्रतिनिधि का भाग्य यह रहा कि उस दल की सरकार कभी नहीं बनी।
रानीखेत विधानसभा के बारे में यह टोटका वर्षों से अनवरत चलता आ रहा है। 2002 में अजय भट्ट विधायक चुने गए तो प्रदेश में एनडी तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी। 2007 में कांग्रेस से करन महरा जीतकर आए तो प्रदेश में भुवनचंद्र खंडूड़ी के नेतृत्व में भाजपा ने सरकार बनाई। 2012 में इस सीट पर अजय भट्ट जीतकर आए तो कांग्रेस की सरकार बनी और 2017 में पुन: करन महरा जीतकर आए तो त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में भाजपा ने सरकार बनाई।
अगर त्रिवेंद्र रावत के कहे अनुसार प्रदेश में 15 साल तक भाजपा की सरकार आती रही तो रानीखेत विधानसभाा के सत्ता से दूर रहने वाले टोटके पर पूर्ण रूप से विश्वास करने वाले अजय भट्ट के लिए इससे अधिक दुखदायी कुछ नहीं हो सकता।

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