नैनीताल।कार्तिक उपाध्याय
जिस क्षेत्र में स्टोन क्रेशर, खड़िया भंडारण और दूसरी खनन गतिविधियों का प्रभाव स्थानीय आबादी झेल रही है, उसी क्षेत्र के सरकारी इंटर कॉलेज में 400 से अधिक बच्चों के लिए पर्याप्त भवन की समस्या ने अब DMF की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसान मंच उत्तराखंड ने राजकीय इंटर कॉलेज हरिपुर ज़मन सिंह के लिए जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) से करीब तीन करोड़ रुपये उपलब्ध कराकर नया तीन मंजिला भवन बनाने की मांग उठाई है।
किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने प्रभारी जिला खान अधिकारी नैनीताल नवीन सिंह से उनके कार्यालय में मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। उपाध्याय ने मांग की कि विद्यालय भवन का प्रस्ताव आगामी DMF बैठक में रखा जाए और खनन प्रभावित क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए धनराशि स्वीकृत की जाए।
मुलाकात के दौरान जिला खान अधिकारी की ओर से बताया गया कि DMF से धनराशि उपलब्ध कराने संबंधी अंतिम निर्णय जिलाधिकारी स्तर से लिया जाता है। इस पर किसान मंच ने ज्ञापन को उनके माध्यम से जिलाधिकारी नैनीताल तक पहुंचाने का अनुरोध किया है। संगठन का कहना है कि जल्द ही जिलाधिकारी से भी मुलाकात कर विद्यालय भवन का मामला सीधे उनके सामने रखा जाएगा।
किसान मंच ने विद्यालय की पिछले पांच वर्षों की छात्र संख्या को अपनी मांग का बड़ा आधार बनाया है। मंच द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में यहां 364 छात्र-छात्राएं थे। वर्ष 2023 में यह संख्या 386, वर्ष 2024 में 424, वर्ष 2025 में 429 और वर्ष 2026 में 406 रही।
किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय का कहना है कि प्रदेश में सरकारी विद्यालयों में घटती छात्र संख्या को लेकर अक्सर चिंता जताई जाती है, लेकिन हरिपुर ज़मन सिंह जैसे विद्यालय में स्थिति उलट है। यहां बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ रहे हैं, लेकिन उनके अनुरूप पर्याप्त भवन और कक्षाएं उपलब्ध नहीं हैं। प्रस्तावित तीन मंजिला भवन पर लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
मामले का दूसरा पहलू क्षेत्र में होने वाली खनन गतिविधियां हैं। किसान मंच के अनुसार हरिपुर ज़मन सिंह और आसपास के गांव स्टोन क्रेशर, खड़िया भंडारण तथा अन्य खनन गतिविधियों से प्रभावित हैं। ऐसे में संगठन का सवाल है कि जब DMF का उद्देश्य ही खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाली आबादी के हितों पर धन खर्च करना है तो क्षेत्र के सरकारी विद्यालय को बेहतर भवन उपलब्ध कराना प्राथमिकता में क्यों नहीं होना चाहिए?
किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा, “खनन हमारे क्षेत्र में हो, उसका प्रभाव हमारे गांव के लोग झेलें और हमारे ही बच्चों के पास पढ़ने के लिए पर्याप्त भवन न हो, यह स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। DMF के पैसे पर खनन प्रभावित क्षेत्र की शिक्षा और स्वास्थ्य का पहला अधिकार होना चाहिए।”
किसान मंच ने इसके साथ ही नैनीताल जिले में DMF के पूर्व खर्च को लेकर भी प्रशासन के सामने सवाल खड़े किए हैं। उपाध्याय का दावा है कि संगठन ने DMF से कराए गए विभिन्न कार्यों से संबंधित दस्तावेज पहले ही जुटा रखे हैं और उसे जानकारी है कि फंड से किस तरह के कार्यों पर धनराशि खर्च की गई है।
उन्होंने कहा कि किसान मंच किसी आवश्यक विकास कार्य का विरोध नहीं करता, लेकिन DMF की प्राथमिकता तय करते समय यह देखा जाना चाहिए कि जिस जनता और क्षेत्र पर खनन का सीधा प्रभाव पड़ रहा है, उसे फंड का कितना लाभ मिल रहा है।
उपाध्याय ने कहा, “अगर विभिन्न विकास कार्यों के लिए DMF से लाखों रुपये दिए जा सकते हैं तो 400 से अधिक बच्चों वाले खनन प्रभावित क्षेत्र के सरकारी इंटर कॉलेज के लिए तीन करोड़ रुपये क्यों नहीं दिए जा सकते? प्रशासन को इस सवाल का जवाब अपने निर्णय से देना होगा।”
किसान मंच ने इस मुद्दे पर आसपास के ग्राम प्रधानों, अभिभावकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी एकजुट होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि विद्यालय के सवाल को दलगत राजनीति से अलग रखकर देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध क्षेत्र के बच्चों की आने वाली पीढ़ियों से है।
फिलहाल मामला जिला खान अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी तक पहुंचाने की प्रक्रिया में है। अब नजर आगामी DMF बैठक और जिला प्रशासन के फैसले पर रहेगी कि खनन प्रभावित हरिपुर ज़मन सिंह के सरकारी इंटर कॉलेज के तीन मंजिला भवन के लिए मांगे गए ₹3 करोड़ को प्राथमिकता मिलती है या बच्चों को अभी और इंतजार करना पड़ता है।


