पिथौरागढ़।सुशील खत्री
धारचूला चौदास वैली को जोड़ने वाली तवाघाट-नारायण आश्रम सड़क को खोलने के दौरान पहाड़ी से गिरे बोल्डर की चपेट में आने से छलमाछिलासो के प्रधान पति संदीप वर्मा घायल हो गए। उनके सिर और आंख के पास चोट आई है। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें धारचूला से जिला अस्पताल पिथौरागढ़ रेफर किया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।
संदीप वर्मा ने बताया कि बीते दिनों भूस्खलन के कारण तवाघाट-नारायण आश्रम सड़क बंद हो गई थी। इन दिनों सड़क को खोलने का कार्य किया जा रहा है। सोमवार को सड़क खोलने के दौरान पहाड़ी पर विस्फोटक का प्रयोग (ब्लास्टिंग) किया गया। इसके बाद अचानक बोल्डर गिरा, जिसकी चपेट में आने से वह घायल हो गए। परिजन उन्हें तत्काल धारचूला उपजिला अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल पिथौरागढ़ रेफर कर दिया। देर रात उन्हें जिला अस्पताल लाया गया।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात एमओ डॉ. अब्दुल ने घायल का उपचार किया। उन्होंने बताया कि संदीप के सिर और आंख के पास चोट आई है। उन्हें भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।
टेंडर किसी और का, काम किसी और ठेकेदार से कराने की बात
जानकारी के अनुसार तवाघाट-नारायण आश्रम सड़क को खोलने का टेंडर किसी अन्य ठेकेदार के नाम है, जबकि मौके पर कार्य किसी दूसरे ठेकेदार से कराए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सड़क खोलने का कार्य किसकी देखरेख में कराया जा रहा था और ब्लास्टिंग की जिम्मेदारी किसकी थी।
एसडीएम को मौखिक जानकारी, ईई अस्कोट को जानकारी नहीं
घटना की जानकारी एसडीएम धारचूला को मौखिक तौर पर दिए जाने की बात सामने आई है। यह जानकारी एसडीएम धारचूला की ओर से दी गई है। वहीं, ईई अस्कोट से मामले में जानकारी लेने पर उन्होंने कहा कि वह मामले की जानकारी प्राप्त कर बताएंगे। इसके बाद जानकारी के लिए किए गए फोन का उनके द्वारा जवाब नहीं दिया गया।
ब्लास्टिंग की अनुमति और सुरक्षा इंतजाम पर सवाल
सड़क खोलने के लिए पहाड़ी पर विस्फोटक का प्रयोग (ब्लास्टिंग) किए जाने के बाद बोल्डर गिरने की घटना ने कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि ब्लास्टिंग के लिए अनुमति किस स्तर से दी गई थी, विस्फोटक का इस्तेमाल किस अधिकृत व्यक्ति या एजेंसी की निगरानी में किया गया और ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ब्लास्टिंग के दौरान किसी व्यक्ति की जान चली जाती या बड़े स्तर पर जानमाल का नुकसान होता तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती? क्या इसके लिए टेंडर लेने वाला ठेकेदार जिम्मेदार होता, मौके पर काम करा रहे ठेकेदार की जवाबदेही तय होती या ब्लास्टिंग की अनुमति और निगरानी करने वाले विभागीय अधिकारियों की? घटना के बाद इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।


