‘माफी मांगने का सवाल ही नहीं’, आत्मसम्मान पर अड़े सुबोध उनियाल
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा, “माफी मांगने का सवाल ही नहीं है। अगर आलाकमान भी मुझे माफी मांगने के लिए बोलेंगे, तब भी मैं इस्तीफा देना पसंद करूंगा, लेकिन अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करूंगा। जीवन में सबसे जरूरी सेल्फ रिस्पेक्ट है।”
मंत्री के इस बयान से साफ है कि दलेर मेहंदी को लेकर दिए गए अपने बयान पर वह पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
विपक्ष लगातार कर रहा सुबोध उनियाल के इस्तीफे की मांग
दलेर मेहंदी के कार्यक्रम को लेकर सुबोध उनियाल की टिप्पणी के बाद प्रदेश की राजनीति में विवाद लगातार बढ़ रहा है। विपक्षी दल मंत्री के बयान को लेकर उनकी घेराबंदी कर रहे हैं और इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। हालांकि, सुबोध उनियाल ने विपक्ष के दबाव के बावजूद अपना रुख बदलने से इनकार कर दिया है।
इससे पहले भी माफी मांगने की खबरों को किया था खारिज
इससे पहले 27 अक्टूबर को भी सुबोध उनियाल ने दलेर मेहंदी से माफी मांगने की खबरों का खंडन किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, जो माफी मांगें।
मंत्री ने यह भी कहा था कि यदि दलेर मेहंदी की तबीयत खराब थी, तो उन्हें कार्यक्रम में नहीं आना चाहिए था। अगर वह कार्यक्रम में आए थे, तो उन्हें अपनी खराब तबीयत की जानकारी पहले ही आयोजकों और दर्शकों को देनी चाहिए थी।
जानिए पूरा विवाद
दरअसल, टिहरी गढ़वाल में आयोजित कुंजापुरी मेले में मशहूर गायक दलेर मेहंदी का कार्यक्रम हुआ था। इस कार्यक्रम में उनकी प्रस्तुति को लेकर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने सवाल उठाए थे।
मंत्री ने आरोप लगाया था कि दलेर मेहंदी मंच पर नशे की हालत में थे, लिप-सिंक कर रहे थे और ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। उनके इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया।
इसके बाद गायक मीका सिंह ने अपने भाई दलेर मेहंदी का बचाव करते हुए सुबोध उनियाल से माफी मांगने की मांग की थी। अब सुबोध उनियाल ने दोबारा स्पष्ट कर दिया है कि वह माफी नहीं मांगेंगे और जरूरत पड़ने पर इस्तीफा देना पसंद करेंगे।






