बिल्डर नही सौंपता डेरा ! मायूस खरीददार, नाकाम ‘रेरा’

रेरा को ठेंगा दिखाते बिल्डर्स 
कुलदीप एस राणा
 “मेगा कॉउंट्री” अपार्टमेंट का रेरा में रजिस्ट्रेशन को बिल्डर ने जमा कराया संदेहास्पद  शपथ पत्र
 रियल एस्टेट रेगुलशन बिल (रेरा) को देहरादून में बिल्डर्स कितनी गम्भीरता से ले रहे हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बिल्डर्स को अपने ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के रेरा में रजिस्ट्रेशन हेतु संदेहास्पद दस्तावेज प्रस्तुत करने से भी गुरेज नही।
  दस्तावेजों मे अलग अलग तिथियों के सहारे रजिस्ट्रेशन का एक ऐसा ही मामला पर्वतजन के संज्ञान में आया है।
   छानबीन करने पर पता चला कि नोयडा की “परतुस रियल एस्टस्ट प्राइवेट लिमिटेड”नाम की कंपन्नी जो वर्ष 2014 से देहरादून के राजपुर में “मेगा कॉउंट्री ” के नाम से अपार्टमेंट का निर्माण कर रही है, ने अपने अपार्टमेंट का रेरा में रजिस्ट्रेशन को लेकर जो दस्तावेज जमा करवाये हैं,उसके अनुसार अपार्टमेंट के कंप्लीशन का समय वर्ष 2019 दर्शाया है , जबकि अपार्टमेंट में फ्लैट के खरीदारों के साथ जो एग्रीमेंट किया गया है, उसमें कंप्लीशन का समय 36 माह अर्थात मार्च 2017 दिया है ।
फ्लैट के खरीदारों को चूना लगा रही नोएडा की “परतुस रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड” कंपन्नी।
समय पर पजेशन न मिलने व बिल्डर द्वारा अनैतिक रूप से ब्याज के पैसे की मांग से पीड़ित एक ऐसे ही खरीदार हैं अजय जुगरान।
खूबसूरत घर इंसान के जीवन का सबसे खूबसूरत सपना होता है , अपने इस सपने को पूरा करने  के लिए वह अपने मेहनत से कमाई पूरी पूंजी दांव पर लगाता है। लेकिन जब यह सपना एक बुरे अनुभव में बदल जाये तो उक्त व्यक्ति के पास कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने के अलावा कोई चारा नही रहता।
अजय जुगरान इन दिनों ऐसे ही एक बुरे अनुभवों के दौर से गुजर रहे हैं। जिन्होंने वर्ष 2014 में  देहरादून -मसूरी रोड़ पर डीआईटी इंस्टीटूट के पास “मेगा कॉउंट्री” नाम से बन रही ग्रुप हाउसिंग  में अपने सपने को आकार लेते देखा। जिसका निर्माण नोयडा की “परतुस रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड ” नाम की कंपन्नी द्वारा किया जा रहा है।
  फ्लैट की बुकिंग के समय कंपन्नी के कर्मचारियों ने अजय जुगरान के समक्ष ग्रुप हाउसिंग की खूबियों को लेकर बड़े बड़े दावे किए। साथ ही ग्लॉसी सीट पर बने फ्लैट व प्रोजेक्ट के interior की 3 डी इमेज दिखा कर ग्रुप हाउसिंग की भीतरी व बाहरी बनावट व सजावट का खूब बखान किया और बताया कि कंपन्नी लगभग 30+6 माह  के अंदर ही उन्हें फ्लैट का पजेशन सौंप देगी।  मसूरी की खूबसूरत घाटी में होने व फ्लैट के चित्रण को देखकर अजय जुगरान ने उसी वर्ष(2014) मार्च माह में ग्रुप हाउसिंग के छठे फ्लोर पर एक 3 बीएचके का फ्लैट बुक करवा लिया। क्योंकि कर्मचारियों की बातों से लग रहा था कि कंपन्नी 36 माह के भीतर यानी वर्ष  2017 तक उन्हें फ्लैट की चाबी सौंप देगी। एग्रीमेंट पेपर में भी पजेशन की समयावधि को प्रकाशित किया गया था । किन्तु जैसे ही बुकिंग की सारी औपचारिकताएं पूरी हुई बिल्डर ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया और  समय- समय पर निर्माण लागत के नाम पर किश्तों में अजय जुगरान से फ्लैट की कुल कीमत का लगभग  77 प्रतिशत रुपया वसूल लिया ।
निर्धारित समय से भी 15 माह अधिक बीत जाने के बावजूद अधूरा है मेगा कॉउंट्री अपार्टमेंट का निर्माण
आज लगभग 50 माह  भी बीत जाने के बाद भी ग्रुप हाउसिंग का निर्माण कार्य पूरा नही हुआ। निर्माण स्थल की वास्तविक स्थिति को देखकर लगता है कि ग्रुप हाउसिंग के निर्माण को पूर्ण होने में कम से कम एक वर्ष का समय लग सकता है। मेगा कॉउंट्री को बनाने वाली कंपन्नी “परतुस रियल एस्टस्ट प्राइवेट लिमिटेड’ के कर्मियों से जब अधूरे निर्माण कार्य ओर पजेशन में देरी  को लेकर बात करनी चाही तो बिल्डर के कर्मचारियों ने अजय जुगरान को समय पर पैसा जमा न करने का दोषी बताते हुए उल्टा उन पर ही देेरी से किश्त जमा न करने का दोषी बताते हुुुए अब उस पर ब्याज जमा कराने  का दबाव बनाया, जबकि एग्रीमेंट पेपर में स्पष्ट लिखा कि अगर 36 माह के अंदर खरीदार को फ्लैट  का पजेशन  नहीं दिया तो ऐसी स्थिति में कंपनी ₹7 प्रति वर्ग फुट की दर से खरीददार को भुगतान करेगी।
खरीदारों से मांग रहा अवैध पैसा
15 माह बीत जाने के बाद भी बिल्डर न तो पेनाल्टी का भुगतान कर रहा है और न ही फ्लैट के पजेशन को लेकर कोई स्थिति स्पस्ट कर रहा है। उल्टे 5 लाख रुपये फ्लैट की किस्त और लगभग 2 लाख रुपये अलग से ब्याज  की मांग कर रहा है, जिस पर थक हार कर अब अजय जुगरान को रियल एस्टेट रेगुलशन अथॉरिटी (रेरा ) में अपनी शिकायत दर्ज कराने को मजबूर होना पड़ा रहा है।
देखना यह है कि रेरा के अधिकारी इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं।

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