गुड न्यूज: न बारातघर न ईदगाह।यहां बनेगा काॅलेज

कमल जगाती, नैनीताल
 देश के सबसे बड़े धार्मिक विवाद को अब तक बुद्धिजीवी जहां सुलझाने में नाकाम रहे हैं, वहीं देवभूमि में दोनों धर्मों ने बारात घर और ईदगाह के विवाद को पंचों के सामने हल निकालकर विवाद को आसानी ने सुलझा लिया।
         उत्तराखण्ड के बाजपुर में दो धर्मों के लोगों ने एक जमीन पर बारात घर और ईदगाह की लड़ाई को बहुत खूबसूरती से सार्वजनिक स्कूल बनाकर सारी लड़ाई ही खत्म कर दी है, जिससे दोनों पक्ष के लोग अब खुश हैं।
    उधम सिंह नगर जिले के बाजपुर स्थित धीमरखेड़ा के इस नव निर्माणाधीन भवन ने उत्तर प्रदेश में सदियों से चले आ रहे राम मंदिर और मस्जिद विवाद को एक आसान और सुखद रास्ता दिखा दिया है। यहां के समझदार लोगों ने बात बात पर तलवारें खिंचने के बाद कई बैठकें कर एक बेहद ही आसान तरीका निकालकर सबके चेहरे पर हंसी ही नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य को सुधारने का रास्ता भी खोल दिया है।
 दरअसल इस विवादित जगह पर हिन्दू धर्म के लोग जहां बारात घर का निर्माण कराना चाहते थे, वहीं मुस्लिम समाज के लोग ईदगाह की कमी के चलते यहां ईदगाह बनाना चाहते थे। हमेशा लड़ने वाले इन साम्प्रदायिक लोगों को स्थानीय विधायक और कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, स्कूल के प्रधानाचार्य और गांव की पंचायत ने एक साथ बैठाया।
गांव में हाई स्कूल और डिग्री कॉलेज तो था लेकिन इंटर की पढ़ाई करने के लिए उन्हें बहुत दूर जाना पड़ता था। जो मसला कई खूनी लड़ाइयों और न्यायालय की पैरवी के बाद भी हल नहीं हो सका, वो लगभग 30 बैठकों के बाद आसानी से हल हो गया। सभी के एकमत होने के बाद निर्णय लिया गया कि यहां बच्चों की पढ़ाई के लिए इंटर कॉलेज नहीं है, इसलिए इस विवादित जमीन में बारात घर और ईदगाह की जगह इंटर कॉलेज बनाया जाए। विवाद समाप्त होने और दोनों धर्मों के बीच खाई पट जाने के बाद राज्य सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय ने 7 मई 2018 को राजकीय इंटर कॉलेज का निर्माण शुरू करवा दिया।
अब इंतजारी है तो उस दिन की जब निर्माण पूरा होने के बाद यहां बारहवीं की कक्षाएं चल रही होंगी और उसमें देश का भविष्य पढ़ रहा होगा। छात्र जहाँ स्कूल खुलने से खुश हैं तो दोनों पक्ष बीच का रास्ता निकलने से खुश हैं।
         मंत्री यशपाल आर्य का कहना है कि वो जमीन ग्राम सभा की थी, जिसमें एक पक्ष बारात घर तो दूसरा पक्ष ईदगाह बनाना चाह रहा था। विवाद खत्म करने के लिए सरकार ने दोनों पक्षों को साथ बैठाया और जमीन को स्कूल के नाम किया। मंत्री ने कहा कि क्षेत्र मे इंटर कॉलेज दूर था जिसके कारण छात्राओं और छात्रों को दूर जाना पड़ता था।

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