बड़ा फैसला: नाबालिग से रेप के दोषी को 20 साल की कठोर कैद। पीड़िता को 5 लाख मुआवजे का आदेश

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीएससी) अदालत ने आरोपी युवक को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने पीड़िता […]

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीएससी) अदालत ने आरोपी युवक को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने पीड़िता को 5 लाख रुपये मुआवजा देने के भी निर्देश जारी किए हैं।

तबीयत बिगड़ने पर खुला था दुष्कर्म का मामला

मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2022 का है। नगर कोतवाली क्षेत्र में किराए पर रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी की तबीयत 22 नवंबर 2022 को अचानक खराब हो गई थी। परिजन उसे उपचार के लिए निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां अल्ट्रासाउंड जांच में किशोरी के छह सप्ताह की गर्भवती होने का खुलासा हुआ।

इसके बाद परिजनों ने जब किशोरी से पूछताछ की तो उसने बताया कि आरोपी युवक लंबे समय से उसके साथ छेड़छाड़ करता था। एक दिन घर में अकेला पाकर उसने उसके साथ दुष्कर्म किया और किसी को घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

शिकायत के बाद आरोपी हुआ था गिरफ्तार

घटना की जानकारी मिलने के बाद पीड़िता के बड़े भाई ने पुलिस को तहरीर दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मेरठ जिले के ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र निवासी आरोपी युवक के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह को अदालत में प्रस्तुत किया गया।

चार साल बाद आया फैसला

करीब चार वर्षों तक चली सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद विशेष अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने आरोपी को 20 वर्ष की कठोर कैद और 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी निर्धारित अर्थदंड जमा नहीं करता है तो उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

 पीड़िता को मिलेगा 5 लाख रुपये मुआवजा

न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि पीड़िता को हुए मानसिक, सामाजिक और आर्थिक आघात को देखते हुए 5 लाख रुपये की मुआवजा राशि एक माह के भीतर उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में पीड़ित पक्ष को न्याय के साथ-साथ पुनर्वास भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त संदेश

इस फैसले को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। अदालत के इस निर्णय से यह स्पष्ट हुआ है कि नाबालिगों के साथ होने वाले अपराधों में दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

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