निदेशक टीएचडीसी-आईएचईटी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग

निदेशक टीएचडीसी-आईएचईटी जीतम सिंह तोमर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी गढ़वाल से लिखित शिकायत दी गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने निदेशक पद पर नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान अपनी स्नातक इंजीनियरिंग की डिग्री के बारे में तथ्यों को छिपाया है।

मैथमेटिक्स, टीएचडीसी-आईएचईटी & प्रेसिडेंट फैकल्टी एसोसिएशन, टीएचडीसी-आईएचईटी टिहरी गढ़वाल केएसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविन्द कुमार सिंह ने निदेशक टीएचडीसी-आईएचईटी पर कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि निदेशक टीएचडीसी-आईएचईटी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए।


उनके अनुसार निदेशक ने निदेशक पद पर नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान अपनी स्नातक इंजीनियरिंग डिग्री के बारे में तथ्यों को पूरी तरह से छिपाया है। उन्होंने अपने आवेदन में अपनी डिग्री के बारे में बार-बार लिखा है कि वो बीटेक हैं, जबकि उन्होंने एमआईई किया हुआ है। एएमआईई की डिग्री को एआईसीटीई की कोई मान्यता नहीं है। इन्होंने एएमआईई डिग्री के स्थान पर बीटेक लिखा है, जो कि पूरी तरह से अपने स्नातक डिग्री को छिपा दिया है तथा नए रूप में प्रकट किया है। येन केन प्रकारेण केवल निदेशक पद पर किसी भी कीमत पर नियुक्ति पाने के लिए इस प्रकार का कृत्य किया गया है। इस प्रकार उन्होंने THDC-IHET, WIT v G B Pant Engineering College Pauri Garhwal में निदेशक के पद पर आवेदन गलत तथ्यों के साथ किया है।


जानकारी के लिए यहां पर एआईसीटीई की ओर से आरटीआई के जवाब में भेजा गया पत्र भी प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि एआईसीटीई ने किसी भी प्रकार कि स्नातक डिग्री को समकक्ष डिग्री कीमान्यता नहीं दी है तथा निदेशक के पद पर योग्यता के मानकों को बहुत स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है।
इस सम्बन्ध में पहले भी विभिन्न पदों पर कार्यरत अधिकारयों को शिकायती पत्रों के माध्यम से तथ्यों के बारे में अवगत कराया गया है। जिसमें कुलाधिपति यूटीयू, कुलपति यूटीयू व उत्तराखंड सचिवालय तकनीकि शिक्षा विभाग सहित सभी संबद्ध अधिकारियों को दिया जा चुका है।


प्रोफेसर डॉ. अरविन्द कुमार सिंह कहते हैं कि उनके पूर्व के शिकायती पत्र पर संज्ञान लेते हुए एआईसीटीई ने उन्हें साक्ष्य के साथ भेजने को कहा था। इस पर उन्होंने साक्ष्य के साथ पुन: शिकायती पत्र भेज दिया है। ऐसे में अब उन्हें इस मामले में तुरंत कार्यवाही की उम्मीद है। उन्होंने थानाध्यक्ष नई टिहरी से भी तथ्यों को छिपाने व गलत तथ्य पेश कर नियुक्ति पाने के कारण निदेशक के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही करने की मांग की है।


कुल मिलाकर उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए व गलत तथ्यों के माध्यम से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी चयन समिति को अंधेरे में रखकर जिस प्रकार से निदेशक पद पर नियुक्ति पाई गई, उससे पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो जाते हैं। अब देखना यह होगा कि निदेशक टीएचडीसी-आईएचईटी के खिलाफ क्या कार्यवाही हो पाती है।

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