बलूनी के समर्थन में उतरे कांग्रेस विधायक करण महरा

कांग्रेस विधायक करण महरा ने राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी का पलायन उन्मूलन अभियान का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि जहां एक और अन्य नेता अपने क्षेत्रों से पलायन कर रहे हैं, वहीं अनिल बलूनी एक ऐसे युवा नेता हैं जो पलायन उन्मूलन की दिशा में बेहतर काम कर रहे हैं। मैं उनके इस कदम […]

कांग्रेस विधायक करण महरा ने राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी का पलायन उन्मूलन अभियान का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि जहां एक और अन्य नेता अपने क्षेत्रों से पलायन कर रहे हैं, वहीं अनिल बलूनी एक ऐसे युवा नेता हैं जो पलायन उन्मूलन की दिशा में बेहतर काम कर रहे हैं। मैं उनके इस कदम से बेहद प्रभावित हूं यह राज्य के हित में उठाया जाने वाला उनका कदम शानदार है, जो अन्य नेताओं को भी पलायन रोकने के लिए काम करने की प्रेरणा देता है।

वहीं दूसरी ओर अनिल बलूनी ने जनरल रावत से ‘पलायन उन्मूलन के अभियान से जुड़ने का अनुरोध किया।

उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने आज थल सेनाध्यक्ष विपिन रावत से ‘अपना वोट- अपने गांव’ अभियान के तहत भेंट की। श्री रावत ने उत्तराखंड में तेजी से हो रहे पलायन पर चिंता जताई और कहा कि कृषि, उद्यानिकी, हर्बल, साहसिक पर्यटन, स्थानीय उत्पाद केंद्रित व्यवसाय आदि को आधार बनाकर स्वरोजगार की दिशा में नीति बनानी चाहिए। श्री बलूनी ने सेनाध्यक्ष को इस अभियान का प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया।

सांसद बलूनी ने ‘अपना वोट- अपने गांव’ अभियान के द्वारा उत्तराखंड मूल की सामाजिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित विभूतियों, उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों से भेंट के क्रम में आज थल सेनाध्यक्ष श्री रावत से भेंट की। इस श्रंखला में श्री बलूनी आगामी 15 अगस्त तक उत्तराखंड मूल के ऐसे महानुभाव के साथ भेंट कर उनसे पलायन उन्मूलन के अभियान से जुड़ने का अनुरोध करेंगे। साथ ही अनुरोध करेंगे कि वह अपना वोट अपने गांव की मतदाता सूची से जोड़ें और समय-समय पर अपने गांव में प्रवास का कार्यक्रम बनाएं, अपने अनुभवों को साझा करें और नई पीढ़ी को गांव में स्वरोजगार हेतु सहयोग और प्रेरित करें।

https://youtu.be/1cyBNDotxa4

श्री बलूनी ने कहा कि जनरल रावत से सौहार्दपूर्ण भेंट हुई और श्री रावत ने कहा कि वे भविष्य में समय-समय पर अपने मूल गांव में प्रवास करेंगे।

उन्होंने इस सामाजिक अभियान की प्रशंसा की और कहा कि देश के सीमांत और सामरिक प्रांतों में पलायन दुखद है। इन स्थानों पर स्थानीय रोजगार के द्वारा नौजवानों को पुष्ट करना चाहिए, ताकि गांव आबाद रहे और हमारी भाषा संस्कृति रीति रिवाज और महान परंपराएं जीवित रह सकें।

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