गुड न्यूज: डाक्टर माधुरी स्वरोजगार कर बनी महिलाओं के लिए मिसाल

मनोज नौडियाल, कोटद्वार ।
विगत वर्ष 22 नवम्बर 2019 को दिल्ली में आयोजित ऑल इंडिया बिजनेस डेवलपमेंट एसोसिएशन के 47 में सम्मान समारोह में कोटद्वार के हल्दुखाता निवासी डॉ माधुरी डबराल को राष्ट्रीय निर्माण रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया यह सम्मान उन्हें जैविक खेती में वर्मी कंपोस्टिंग और वर्मी वाश पर किए गए शोध एवं विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है।
  माधुरी डबराल ने हेमवंती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से पर्यावरण विज्ञान से स्नाकोत्तर गुरुकुल कांगड़ी विवि से पीएचडी भी किया है। उन्होंने जैविक वर्मी कंपोस्ट उत्पादन इकाई में वर्मी कंपोस्ट उत्पादन के साथ-साथ कई गांवों के किसानों के साथ उल्लेखनीय कार्य किए हैं।इसके साथ ही उन्होंने केंचुए  द्वारा बनने वाले तरल खाद वर्मी वाश को जैविक कीटनाशक जैविक फफूंदी नाशक के रूप में विकसित किया।
डाक्टर माधुरी डबराल इससे पूर्व देश भर के 600 से अधिक किसानों के साथ वर्मी कल्चर का कार्य सफलतापूर्वक कर चुकी है।वह ग्राफिक एरा डीम्ड विवि में पर्यावरण विज्ञान विभाग की अध्यक्ष भी रह चुकी है। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान आईसीएआर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी में भी वेद और युवा महिला वैज्ञानिक के रूप में शोध प्रोजेक्ट कर चुकी है। डाक्टर माधुरी डबराल ने बताया कि वह विगत 17 सालों से कचरे से खाद बनाती रही है। वह खाद बनाकर उसको बेचकर स्वरोजगार अपना रही है।
स्वरोजगार से जुड़ने के बाद उन्होंने पाँच और व्यक्तियों को अपने यहां रोजगार दे रखा है जोकि अपने में ही एक मिसाल है।

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