सीमांत गांवों में ठप दूरसंचार सेवा, विभाग और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में बेसुध

नीरज उत्तराखण्डी/उत्तरकाशी

आपदाओं के लिहाज से वेहद संवेदनशील मोरी ब्लाक में दूभर हुई दूर संचार सेवा से ग्रामीण जनता और पर्यटक खासे परेशान हैं, लेकिन दूर संचार विभाग सेवा में सुधार लाने की सुध नहीं ले रहा है।
सीमांत गांवों में दूर संचार सेवा की दुर्दशा और लचर सेवा से सीमांतवासी और देश विदेश से आये पर्यटक खासे परेशान है। संचार सेवाएं सुधारने के लिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों तथा तहसील और जिला प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। विभाग के कानों में जूं तक नहीं रेंगी।
बीएसएनएल की लचर और त्रुटि पूर्ण सेवाओं से उपभोक्ता परेशान है। मोरी ब्लाक के सांकरी नैटवाड जखोल क्षेत्र के दर्जनों गांवों में दूर संचार सेवा ठप होने से मोबाइल टावर शोपीस बनकर रह गये है।
पर्यटन की दृष्टि से मुफीद बनें मोरी के केदरकांठा में पर्यटकों की खासी चल पहल है, लेकिन दूरसंचार सेवा दुरूस्त न होने से पर्यटकों को खासी फजीहत झेलनी पडती है। ग्रामीणों और पर्यटकों को मोबाइल पर अपने सगे संबंधियों से बात करने के लिए मोरी या पुरोला आना पड़ता है। मोबाइल सेवा ठप होने से आपदा में सूचना का आदान-प्रदान नहीं हो पाता है।
विगत शनिवार दूरसंचार के ठप होने से संपर्क न होने से प्रसव पीड़ित महिला की दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन विभाग कुंभकर्णी नींद में सो रहा है और प्रशासन सुध नहीं ले रहा है।
ग्रामीण के पास अब विभाग और प्रशासन को गहरी नींद से जगाने के लिए एक मात्र विकल्प आंदोलन और धरना प्रदर्शन रह गया है।
सीमांत गांवों के वाशिदों ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र में दूर संचार सेवा जल्दी ठीक नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को विवश होगे।
तहसीलदार के माध्यम से जिला अधिकारी को प्रेषित ज्ञापन में चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र दूरसंचार सेवा बहाल नहीं की जाती है तो आंदोलन किया जायेगा।

ज्ञापन में सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गेश लाल, चैन सिंह रावत, राज मोहन, रामवीर, प्रेम सिंह, भरत सिंह, शशी डोभाल, जय राम, प्रताप आदि दर्जनों लोगों के हस्ताक्षर हैं।

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