खुलासा : देहरादून में 108 सेवा और फर्जी अस्पताल के डॉक्टरों का फर्जीवाड़ा। मरीज को लगाया डेढ़ लाख का चूना 

अमित तोमर 

 विकास नगर निवासी मुकेश 27 दिसंबर 2019 का एक्सीडेंट में पांव टूट गया तो उन्होंने 108 नंबर की एंबुलेंस बुलाई। एंबुलेंस चालक अबरार को उन्होंने दून अस्पताल ले चलने को कहा लेकिन कई बार कहने के बावजूद एंबुलेंस चालक अबरार उन्हें बल्लीवाला चौक के जावला मेडिकल सेंटर पर ले गया और वही भर्ती करा दिया।

देखिए वीडियो : क्या कहते हैं मरीज और परिजन !

https://youtu.be/netm9zpEPjQ

 वहां पर पहले से ही रिसेप्शन पर बैठी सना और अलीशा चौहान नामक दो महिलाएं और अपने को डॉक्टर बताने वाले ललित लहरी नाम के लोग थे।
 मरीज की बहन सीता देवी ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि उन्होंने अबरार को भाई जान कहकर संबोधित किया और डॉक्टर वकार के कहने पर रिसेप्शनिस्ट सना ने अबरार को ₹2000 लाकर दिए तथा एंबुलेंस चालक अबरार वहां से चला गया। एक बार फिर से जब अबरार से दून अस्पताल ले जाने की विनती की गई तो अबरार उन्हें वही तड़पता छोड़ कर चला गया।
 इसके बाद डॉ वकार और ललित लहरी ने उन्हें एक और एंबुलेंस से एक्स-रे कराने के नाम पर चंदन डायग्नोस्टिक ले गए और उसके बाद मरीज की टांग टूटी हुई बताते हुए उन्हें अगले दिन 28 दिसंबर को डॉ प्रसून माहेश्वरी के क्लीनिक पर ले जाकर भर्ती कर दिया और बताया कि टांग टूटी हुई है और टिटेनियम की रॉड डाली गई है। कुछ दिन भर्ती रखने के बाद 5 जनवरी 2020 को डिस्चार्ज करते हुए कहा कि इनकी राॅड 4 मार्च को निकाली जाएगी। पूरे इलाज के नाम पर उन्होंने सीतादेवी डेढ़ लाख रुपए ले लिए।
पुलिस मे शिकायत 
 4 मार्च को जब सीता अपने भाई को लेकर जावला मेडिकल सेंटर पहुंची तो पता चला कि वहां पर सना, अलीशा और डॉ वकार के नाम के लोग तो है ही नहीं। वे भाग चुके थे, जबकि डॉ ललित ने उन्हें फिर से प्रसून माहेश्वरी के क्लीनिक पर ले जाकर दिखाया।
 यहां पर डॉक्टर प्रसून ने उन्हें बताया कि ऑपरेशन करके टाइटेनियम की रोड डाली जाएगी यह सुनते ही सीता देवी के पांव तले जमीन खिसक गई। क्योंकि 2 महीने पहले ही उसके भाई के पैरों में राॅड डालने की बात कही गयी थी और रॉड निकालने के लिए ही तो 4 मार्च को बुलाया था।
 डॉ प्रसून ने सीता देवी के भाई का फिर से एक्स-रे किया और दिखाया कि इसमें कोई राॅड ही नहीं थी। अब सीता देवी ने डॉ ललित से अपने भाई के इलाज की फाइल लौटाने को कहा तो ललित ने उसके साथ गाली गलौज कर दी।
 उसने आसपास मालूम किया तो पता चला कि वकार और ललित तो डॉक्टर है ही नहीं, बल्कि वह इसी तरह से सब मिलकर एक गिरोह बनाकर मरीजों को और गरीब लोगों को लूटते हैं।
 सीता देवी ने इसकी शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से की है। देखना यह है कि इन गरीब मजदूरों को क्या न्याय मिलता है, और देहरादून में इस तरह के फर्जी डॉक्टरों तथा 108 सेवा के ऐसे कर्मचारियों को क्या सजा मिलती है !
शेष तहरीर

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