वन आरक्षी उत्पीड़न में विधायक ने वन महकमे के खिलाफ खोला मोर्चा

अनुज नेगी/देहरादून

राजाजी टाइगर पार्क में कुछ दिन पहले एक वन आरक्षी ने अपने रेंजर व सेक्सन इंचार्ज पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए अपने वन महकमे के उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी, मगर वन महकमे के आलाधिकारियों ने इस वन आरक्षी का दर्द समझने की कोशिस तक नही की और साफ पल्ला झाड़ दिया है।
वही वन आरक्षी के उत्पीड़न का मामला जब स्थानीय विधायक ऋतु खण्डूरी के तक पहुँचा तो विधायक ने वन महकमे के आलाधिकारियों को जमकर फटकार लगाते हुए वन आरक्षी के उत्पीड़न की जांच के आदेश दे दिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए।

राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के गोहरी रेंज में कुछ दिनों पूर्व 84 कुटी के चर्चित पत्र प्रकरण मामले में नया मोड़ आ गया है। वन आरक्षी द्वारा रेंज अधिकारी व सेक्सन इंचार्ज पर लगाये गए उत्पीड़न के आरोप पर स्थानीय विधायक ने भी मोर्चा खोल दिया है।

गौरतलब है कि गोहरी रेंज के 84 कुटी इंचार्ज ने अपने संगठन को लिखे खुले पत्र में सेक्सन इंचार्ज अजीत सोम व रेंज अधिकारी धीर सिंह पर गम्भीर आरोप लगाए थे। इस पत्र में उन्होंने इन अधिकारियों द्वारा 84 कुटी के राजस्व से तीन लाख रुपये प्रतिमाह देने की मांग की थी। वह आरक्षी के इस पत्र के बाद पार्क महकमे में हड़कम्प मच गया था।

 

वन कर्मचारियों से जुड़े संघठनो ने इस मामले में निदेशक से वार्ता कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग की गई थी। मगर अब तक दोनों दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही न किया जाना के सवालों को खड़ा कर रहा है। वन्ही इस सम्पूर्ण प्रकरण पर स्थानीय विधायक ने भी मोर्चा खोल दिया है।

वन आरक्षी

यमकेस्वर विधायक ऋतु खंडूरी ने कुछ दिनों पूर्व पार्क निदेशक को पत्र लिख कर इस मामले में कठोर कार्यवाही की मांग की है। विधायक के पत्र व वन कर्मचारियों से जुड़े संगठन के विरोध के बावजूद भी पार्क महकमे के अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही न किया जाना के सवालों को खड़े कर रहा है।

वन आरक्षी

जांच हो तो होंगे कई खुलासे

विदेशियो के सैरगाह के रूप में प्रसिद्ध 84 कुटी हमेशा से ही विवादों में रहा है। यंहा पर्यटकों से होने वाली आमदनी में जबरदस्त खेल होता रहा है। वन आरक्षी द्वारा लिखे इस पत्र से ही इसकी पुष्टि हो रही है। आखिर वो कोन से कारण है कि परमानेंट कर्मचारी कभी बिलिंग काउंटर पर नही बैठते। क्यों संविदा कर्मियों से ही बिलिंग करवाई जाती है। इन्ही अनिमियताओ को लेकर कुछ माह पूर्व तत्कालीन उपनिदेशक दीपक ने यंहा की जांच भी की थी। उपनिदेशक ने कई खामियां पाई थी। उसके बाद उनके द्वारा वन कर्मियों को कड़ी फटकार भी लगाई गई थी।
सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर क्यों इस गंभीर प्रकरण पर वन महकमे के आलाधिकारी दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे है। आखिर क्यो 84 कुटी में तैनात कर्मियों की जांच नही करवाई जा रही है।अगर प्रशासन इस मामले में गंभीरता से जांच करता है तो 84 कुटी के राजस्व में हुई बड़ी अनमिताओ का खुलासा हो सकता है और कई वन अधिकारियों व वन कर्मियों पर गाज गिर सकती है।

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