दीपक भी जले, मोमबत्ती भी जली। प्रवासी उत्तराखंडियों की वापसी के लिए लोगों ने दिखाई एकजुटता।

राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में फंसे प्रवासी उत्तराखंडियों को सकुशल वापस बुलाए जाने की मांग को लेकर आज उत्तराखंड के जागरूक लोगों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अपने अपने घरों में मोमबत्ती और दीपक भी जलाए और मोबाइल की लाइट भी जलाई।

इस अभियान में बच्चे महिलाएं और पुरुष सभी शामिल थे। गौरतलब है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में फंसे प्रवासियों के लिए आज रात 8:00 बजे वरिष्ठ पत्रकार तथा सोशल एक्टिविस्ट की भूमिका में उतरे उमेश कुमार ने उत्तराखंड वासियों से घरों में दीपक अथवा मोमबत्ती जलाने का आव्हान किया था।

 एक आह्वान पर लोगों ने एकजुटता दिखाई और अपने-अपने घरों में दीपक मोमबत्ती जलाई और थाली आदि बजाई।

मुहिम ने दिखाया कि कोई भी विचार छोटा नहीं होता। विगत काफी दिनों से प्रवासियों को वापस लाने के लिए उमेश कुमार ने जो मुहिम छेड़ी हुई थी उसका संज्ञान आखिरकार अन्य राजनीतिक दलों को भी लेना ही पड़ा।

इस अभियान से एक ओर उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए प्रवासियों का मनोबल बना रहा तो वही सरकार भी उन्हें वापस बुलाने  को खाने के लिए मजबूर हुई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहली बार आज फेसबुक पर अपने संबोधन में कहा है कि “बाहरी प्रदेशों में फंसे उत्तराखंडियों की जल्द वापसी के लिए निर्देश उन्होंने मुख्य सचिव को दे दिए हैं।”

आज गृह मंत्रालय ने भी विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी उत्तराखंड कि लोगों को वापस लाने के लिए कहा है।

गृह मंत्रालय ने अपने बयान में जो कहा है उसके अनुसार उस पर नया कुछ भी नहीं है।

गृह मंत्रालय ने कहा है कि इसके लिए राज्य सरकारें आपस में समन्वय स्थापित करेंगी और जो भी वापस जाना चाहते हैं उनकी स्क्रीनिंग होगी और कोरोना जांच के बाद उन्हें वापस लाया जा सकेगा। इसके साथ ही राज्य सरकारें इसके लिए एक नोडल अधिकारी की तैनाती करेंगी।

यह सब व्यवस्थाएं तो पहले से ही हैं।

इसमें नया कुछ भी नहीं है।

गृह मंत्रालय के आदेश में ऐसा कुछ भी नहीं है जो राज्य सरकारें पहले से ना कर रही हो।

हां इतना जरूर हुआ है कि चौतरफा छीछालेदर के बाद और गृह मंत्रालय के आदेश के बाद उत्तराखंड सरकार पहली बार फेसबुक पर आकर प्रवासियों के लिए कुछ बोली है और इससे उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार सक्रियता दिखाते हुए कुछ दिनों में ही प्रवासियों को वापस लाएगी।

फिलहाल सरकार और प्रशासन विभिन्न राज्यों में फंसे हुए उत्तराखंड के प्रवासियों को 3 मई तक जहां है वहीं रहने के लिए कह रहा है।

3 मई को लॉक डाउन पर निर्णय होने के बाद प्रवासियों के दिन बहुरने की संभावना है।

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