गढ़वाल में प्रसूता ने निजी वाहन में दिया बच्चे को जन्म, खुद की गई जान

गढ़वाल में प्रसूता ने निजी वाहन में दिया बच्चे को जन्म, खुद की गई जान रिपोर्ट- इंद्रजीत असवाल सतपुली। उत्तराखण्ड में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते जनपद पौड़ी गढ़वाल में एक महिला ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही एक निजी वाहन में बच्चे […]

गढ़वाल में प्रसूता ने निजी वाहन में दिया बच्चे को जन्म, खुद की गई जान

रिपोर्ट- इंद्रजीत असवाल
सतपुली। उत्तराखण्ड में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते जनपद पौड़ी गढ़वाल में एक महिला ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही एक निजी वाहन में बच्चे को जन्म दे दिया। उचित चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण नवजात को लेकर अस्पताल पहुंची, प्रसूता को 10 घंटे बाद भी नहीं बचाया जा सका।

मिली जानकारी के अनुसार लैंसडौन तहसील क्षेत्र के किमार गांव पट्टी कौड़िया निवासी एक महिला को प्रसव पीड़ा होने के बाद गांव से नजदीकी अस्पताल हंस फाउंडेशन के लिए परिजनों द्वारा निजी वाहन से लाया जा रहा था। किन्तु महिला ने वाहन में ही बच्चे को जन्म दे दिया, लेकिन वह चिकित्सा सुविधा के अभाव में ही अस्पताल पहुंची, जहां दस घंटे बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। महिला ने बेटे को जन्म दिया है। राजस्व पुलिस ने शव का पंचायतनामा भरने के बादा पोस्टमार्टम करा परिजनों के सुर्पद कर दिया है।

लैंसडौन तहसील के चमोलीसैंण पटवारी अब्दुल हमीद ने बताया कि, किमार गांव निवासी 37 वर्षीय पिंकी देवी पत्नी सोनू कुमार को गत 8 जनवरी को प्रसव पीड़ा होने पर निजी वाहन से हंस अस्पताल चमोलीसैंण ले जा रहे थे। पिंकी देवी ने निजी वाहन में ही बेटे को जन्म दिया। इसके बाद उसे हंस अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां बीती 9 जनवरी को सुबह करीब 9 बजे उसकी मौत हो गई।

पटवारी अब्दुल हमीद ने चिकित्सकों से मिली जानकारी के अनुसार बताया कि प्रथम दृष्टया पिंकी देवी को प्रसव के दौरान बहुत अधिक ब्लीडिंग और प्लेट गिरने से मौत होना प्रतीत लग रहा है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के स्पष्ट कारण के बारे में कहा जा सकता है।

पटवारी ने बताया कि, पिंकी देवी के शव का पंचायतनामा भरकर तथा राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार में पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया है। उन्होंने बताया कि नवजात बच्चा स्वस्थ है, जिसे डॉक्टरों ने घर भेज दिया है। ज्ञात हो कि स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में उत्तराखण्ड में दर्जनों गर्भवती महिलाओं की अस्पताल जाते समय वाहन में ही बच्चे को जन्म देने के बाद मौत हुई है।

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