कहीं कोरोना की मार तो कहीं बिजली की किल्लत ! कुछ गांव पिछले 5 दिनों से देश और दुनिया से हुए दूर

रिपोर्ट / गिरीश चंदोला

थराली

थराली विकासखण्ड बिजली गुल मीटर चालू वाली बात सटीक साबित हो रही है। कहीं कोरोना की मार तो कहीं बिजली की किल्लत से इस दिनों ग्रामीण परेशान है। वही स्कूली बच्चो की ऑनलाइन पढ़ाई भी ठप पढ़ी है। 

 इन दिनों थराली के कुछ गांव पिछले 5 दिनों से देश और दुनिया से दूर भी हैं और मजबूर भी हैं। मजबूरी भी ऐसी की बीती 5 रातों से थराली विकासखण्ड के तुंगेश्वर ओर देवराड़ा गांव के ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।

 यहां घर पर रहकर टेलीविजन पर देश दुनिया के हालात जानना तो दूर ग्रामीण बिना लाइट के अपना फोन तक चार्ज नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में विद्युत विभाग पिछले 5 दिनों से यहां के ग्रामीणों को दूर परदेश में रह रहे अपनो से दूर किये हुए है बिना बिजली के जहां व्यापारियों का व्यापार प्रभावित हो रहा है ।

वहीं ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्र भी मोबाइल चार्ज न होने के चलते पढ़ाई से वंचित चल रहे हैं, लेकिन विभागीय सुस्ती का आलम तो देखिए पिछले 5 दिनों से विद्युत विभाग तुंगेश्वर में खराब पड़े ट्रांसफार्मर को बदल तक नही पाया है।

 दरसल 5 दिन पहले मौसम खराब होने के बाद तुंगेश्वर में ट्रांसफार्मर जल गया था। जिसके बाद से ही तुंगेश्वर ,देवराड़ा ओर आसपास के गांवों की विद्युत आपूर्ति ठप हो गयी थी।

 ग्रामीणों और व्यापारियों ने इसकी शिकायत टेलीफोन के जरिये विद्युत विभाग के आला अधिकारियों से करते हुए विद्युत आपूर्ति बहाल करने की मांग की थी, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी अब तक न तो ट्रांसफार्मर ही बदला गया है और न ही विद्युत आपूर्ति बहाल करने के लिए कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकी है।

 आलम ये है कि, मीडिया से बातचीत में यहां के ग्रामीण बताया कि, अधिकारी व्यवस्था को दुरस्त करने की बजाय एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोपते हुए खुद पल्ला झाड़ने की कोशिश में जुटे हैं ।

वहीं  टेलीफोन पर विद्युत विभाग के अभियंता से ट्रांसफार्मर न बदल पाने का कारण जानने की कोशिश की तो मालूम चला थराली विद्युत खंड में ट्रांसफार्मर की किल्लत चल रही है। ऐसे में श्रीनगर से ट्रांसफार्मर मंगाया गया है जो शुक्रवार की शाम तक पहुंचने की उम्मीद है।

अब जरा अंदाजा लगाइए कि, ऊर्जा प्रदेश के नाम से विख्यात उत्तराखंड का विद्युत विभाग कितना सुस्त है। जहां थराली से तकरीबन 110 किलोमीटर है और महज आधे दिन में ही यहां आना जाना हो सकता है लेकिन सुस्त विद्युत विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को 110 किलोमीटर की दूरी से ट्रांसफार्मर लाने में 5 दिन लग रहे हैं। अभी इसकी भी कोई गारंटी नहीं है कि, टेलीफोनिक आश्वासन के बाद तय समय पर ही ट्रांसफार्मर थराली पहुंच जाएगा।

एक ओर जहां बिजली के बढ़े दामो और महंगे बिलो से अवाम परेशान है। वहीं सुविधाओ के नाम पर थराली का विद्युत विभाग सुस्त चाल से काम कर रहा है और व्यवस्थाओं के नाम पर घोड़े बेचकर सो रहा है।

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