हाईकोर्ट ब्रेकिंग: सिंगल यूज प्लास्टिक के फैसले पर जवाब-तलब सरकार। चार हफ्ते में मांगा जवाब

सिंगल यूज प्लास्टिक के फैसले पर जवाब-तलब सरकार। चार हफ्ते में मांगा जवाब

 

रिपोर्ट- कमल जगाती
नैनीताल। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने राज्य में सिंगल यूज प्लास्टिक कटलरी के निर्माण पर रोक लगाने सम्बन्धी सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार से 4 हफ्ते में जबाव देने को कहा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई और मामले की अगली सुनवाई 30 जून को तय की गई।

मामले के अनुसार स्नो पैक फर्म और सिंगल यूज प्लास्टिक कटलरी निर्माताओं ने 16 फरवरी 2021 के सरकारी आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उत्तराखंड राज्य में सिंगल यूज प्लास्टिक कटलरी के सभी निर्माण पर प्रतिबंध लगाया गया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डॉ कार्तिकेय हरि गुप्ता ने बताया कि, यह आदेश उत्तराखंड प्लास्टिक और अन्य गैर बायोडिग्रेडेबल कचरा (उपयोग और निपटारन विनियमन) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। अधिनियम में प्रावधान है कि, प्लास्टिक के उपयोग और निर्माण को प्रतिबंधित किया जा सकता है, यदि यह किसी अधिसूचना द्वारा राज्य द्वारा प्रदान किए गए मानदंडों का उल्लंघन करता है।

लेकिन राज्य सरकार द्वारा कोई मानदंड अधिसूचित नहीं किया गया है। किसी भी मानदंड के अनुरूप होने वाली अधिसूचनाओं के अभाव में निर्माण और बिक्री पर इस तरह का अचानक प्रतिबंध मनमाना, अवैध और अल्ट्रा वायरस है। लेकिन यह खराब कचरा निपटान प्रबंधन है, जो प्लास्टिक प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। विनिर्माण गतिविधि अपने आप में प्रदूषण पैदा नहीं कर रही है, बल्कि पहले से मौजूद प्लास्टिक के कचरे का पुनर्चक्रण कर रही है और यह कागज और लकड़ी-आधारित कटलरी का किफायती विकल्प प्रदान कर रही है। ये फर्में राज्य को कर और रोजगार दे रही हैं।

याचिकाकर्ता ने अदालत से प्रार्थना की है कि, उन्हें राज्य और देश के बाहर प्लास्टिक उत्पादों को इच्छुक खरीदारों को निर्यात करने की अनुमति दी जाए, ऐसे में उत्तराखंड राज्य के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। पहले से ही हमारे 95% उत्पाद राज्य से बाहर निर्यात किए जा रहे थे। ऐसे कई राज्य हैं जो अभी भी खरीदने को तैयार हैं। न्यायालय के सामने यह भी तर्क दिया गया कि, सभी पी.पी.ई. किट प्लास्टिक के बने होते हैं। वे तभी प्रदूषक बनते हैं जब उनका निपटान अनुचित होता है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई और मामले की अगली सुनवाई 30 जून को तय की गई।

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