नाराज उच्च न्यायालय ने रोडवेज इम्प्लॉइज मामले में छुट्टी के दिन सरकार के उच्चाधिकारियों को किया तलब

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):-  उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन की जनहित याचिका में पांच माह से वेतन नहीं देने के मामले में आज मुख्य सचिव, वित्त सचिव, परिवहन सचिव और महानिदेशक उत्तराखंड परिवहन निगम को कल शनिवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को कहा है । न्यायालय ने शनिवार को अपनी छुट्टी […]

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- 

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन की जनहित याचिका में पांच माह से वेतन नहीं देने के मामले में आज मुख्य सचिव, वित्त सचिव, परिवहन सचिव और महानिदेशक उत्तराखंड परिवहन निगम को कल शनिवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को कहा है । न्यायालय ने शनिवार को अपनी छुट्टी के बावजूद इन अधिकारियों को स्पेशल कोर्ट में जवाब के साथ उपस्थित रहने को कहा है ।

उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश आर.एस.चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के सम्मुख उत्तराखंड परिवहन निगम के नवनियुक्त महानिदेशक अभिषेक रूहेला उपस्थित हुए । न्यायालय ने आज किये अपने आदेश में चीफ स्टैंडिंग काउंसिल(सी.एस.सी.) द्वारा बिना शपथपत्र वाले संबंधित दस्तावेजों का जिक्र किया ।

न्यायालय ने अपने आदेश में लिखा है कि परिवहन सचिव ने सी.एस.सी.को पत्र लिखकर कहा है कि वो कर्मचारियों को 23 करोड़ रुपये का वेतन देने की इच्छा रखते हैं । कहा है कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से निगम को 20 करोड़ रुपये की धनराशि नहीं दी जा सकती।

आदेश में कहा गया है निगम की इस मध में आसान रिण की फ़ाइल सरकार के पास विचाराधीन है । न्यायालय ने 14 जून को परिवहन सचिव की अध्यक्षता में निगम को पुनरजीवित करने की रणनीति वाली मीटिंग का जिक्र करते हुए कहा है कि सरकार, निगम की बदहाली का विस्तार से परीक्षण कर निगम को सुधारने का मन बना रही है ।

न्यायालय ने अभिषेक रूहेला के बयान को आदेश में लिखते हुए कहा कि न तो सरकार ने आसान लोन और न ही मुख्यमंत्री विवेकाधीन मद से निगम को 20 करोड़ रुपये दिए गए हैं । आदेश में सी.एस.सी.के बयानों में लिखा है कि सरकार, पहाड़ी नुकसान के रूप में 20 करोड़ रुपये देने की इक्छुक है और इसकी योजना बना रही है, लेकिन अभीतक निगम से कोई प्रस्ताव नहीं आया है । खंडपीठ के आदेश में कहा गया है कि सरकार संवैधानिक स्कीम के तहत नागरिकों के जीवन को सुरक्षित रखने और विकसित करने के लिए बाध्य है । न्यायालय ने सरकार को लेबर लॉ याद दिलाते हुए कहा कि वो इस बात का भी ध्यान रखे कि नियमों के तहत एक भी कर्मचारी का वेतन न कटे ।

न्यायालय ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार रुपये देने की इच्छा जता रही है और दूसरी तरफ निगम से प्रस्ताव नहीं आने की बात करती है, ऐसे में परिवहन सचिव उसी देहरादून में बैठे वित्त सचिव तक प्रस्ताव नहीं पहुंचा पा रहे हैं । कर्मचारियों को इस वर्ष फरवरी से जून तक का वेतन नहीं मिला है । न्यायालय ने इन कर्मचारियों को बचाने के लिए मुख्य सचिव ओम प्रकाश, वित्त सचिव अमित नेगी, परिवहन सचिव डॉ.रंजीत कुमार सिन्हा और उत्तराखंड परिवहन निगम के एम.डी.अभिषेक रूहेला को कल न्यायालय में वर्चुअली उपस्थित होने को कहा है ।

खंडपीठ की गंभीरता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि कल शनिवार की छुट्टी होने के बावजूद न्यायालय ने विशेष अदालत लगाकर सभी संबंधित अधिकारियों को तलब किया है ।

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