शिक्षा के प्रति सरकार का उदासीन रवैया। स्थापना के सात वर्ष बाद भी नहीं बना राजकीय महाविद्यालय भवन

सतीश डिमरी गोपेश्वर (चमोली)                                                 सरकार के शिक्षा के प्रति किए गए अनेकों दावों को धरातल पर देखा जा सकता है, जिसकी तस्वीर धरातल पर कुछ और ही बयां करती है। शिक्षा के प्रति सरकार का उदासीन रवैया प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक देखा जा सकता है।                                                      चमोली जिले के दुर्गम क्षेत्रों के महाविद्यालयों की स्थिति देंखे तो सरकार का मानना है कि उनके द्वारा दुर्गम क्षेत्र के बच्चों की सुविधा के लिए महा विद्यालय खोल दिए गए हैं, लेकिन देखा जाय तो दुर्गम क्षेत्रों में महाविद्यालय खोलने के नाम पर यह दावे सिर्फ औपचािकता भर है।

क्योंकि चमोली जिले के विकास खंड घाट के राजकीय महाविद्यालय की बात करें तो यह महाविद्यालय वर्ष 2014 में घाट की जनता ने विशेष मांग तत्कालीन सरकार के समक्ष रखी थी, ताकि क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा लेने हेतु अन्य जगह न जाना पड़े। 

तत्कालीन परिस्थिति को देखते हुए यह महाविद्यालय निजी भवन पर प्रारंभ किया गया था, ताकि कुछ समय बाद महाविद्यालय को भवन निर्माण हेतु स्थल/ भूमि उपलब्ध कराई जा सकेगी।

 वर्तमान प्राचार्य डा. के. एन. बरमोला जी एवं घाट क्षेत्र के स्थानीय व्यक्ति पूर्व पी. टी. ए. अध्यक्ष का कहना है कि महाविद्यालय के लिए स्थानीय लोगों द्वारा भूमि उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन वह भूमि आपदा ग्रस्त हो चुकी है जिस कारण वह भूमि अब महाविद्यालय बनने योग्य नहीं रह गई है। 

प्राचार्य जी का कहना है, कि उनके अथक प्रयासों के बाद अब फिर भूमि उपलब्ध हुई है, जो कि रानी कोट नामक स्थान पर उपलब्ध हुई है, लेकिन वहां पर भी आधा कार्य प्रारम्भ हुआ है, जिसमें कि बहुत सारे अवरुद्ध सामने आ रहे हैं, जिसमें कि वहां तक अभी सड़क की सुविधा नहीं मिल पाई है।

 इसी के साथ कुछ स्थानीय अवरुद्ध भी सामने आ रहे हैं। इसके अलावा जिस ठेकेदार के साथ भवन बनाने का अनुबन्ध था वह भी आधा कार्य करने के बाद मुकर रहा है, जिससे कि अन्य ठेकेदार को यह कार्य करने को अनुबन्धित किया गया है।

 यदि इस भवन पर कार्य शीघ्रता से होता है तो यह भवन माह जून तक महाविद्यालय को हस्तांतरित हो जाएगा। लेकिन यह कार्य करने पर निर्भर है। 

 वर्तमान में महा विद्यालय एक निजी भवन पर संचालित होने के कारण छात्र छात्राओं को उच्च शिक्षा ग्रहण जैसी सुविधा का अभाव सीधे देखा जा सकता है, जहां कि प्रतिभावान विद्यार्थियों के लिए अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का उचित स्थान नहीं है, ना ही ऐसा कोई खेल का मैदान है जिसमें विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को बढ़ाने का कार्य कर सकें। 

जहां उत्तराखंड सरकार खेल को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है वहीं घाट महाविद्यालय में इसका अभाव देखा जा सकता है। 

इसी के साथ प्राचार्य डा. के. एन बरमोला जी का कहना है कि उनके पास वर्तमान में पूर्ण स्टाफ है, जिसमें कि प्रवक्ता वर्ग से लेकर कार्यालय स्टाफ।

 उनका कहना है कि उनके पास संसाधनों की कमी नहीं है लेकिन बस अभाव है तो महा विद्यालय भवन का, जिसकी पूर्णता के लिए हम प्रयास रत हैं। यदि सबका सहयोग मिलता है तो भवन शीघ्र ही बनकर तैयार हो जाएगा। 

इसके साथ ही दुर्गम क्षेत्र बच्चों द्वारा भी मीडिया के सामने शिक्षा में आ रही सस्याओं को रखा,जिसमें की उनके द्वारा बताया गया कि वह विद्यालय में काफी दूर से आते हैं, साथ ही ऑन लाइन क्लास में नेट वर्क की प्रॉब्लम महंगे फोन न होने का कारण के साथ साथ डाटा नेट पैक महंगे होने तथा सुद्ध संचार का अभाव भी होता है। 

अब  देखना यह होगा कि इस खबर का कितना असर होता कि राजकीय महाविद्यालय घाट का अपूर्ण भवन पर कार्य प्रारम्भ के संग ही कब पूर्णता की ओर जाता है। 

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