कुली बेगार की धरती से उठी कुमाउनी भाषा को आठवीं सूची में शामिल करने की मांग।

रिपोर्ट – राजकुमार सिंह परिहार

तेरहवाँ राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन का बागेश्वर के होटल नरेंद्रा में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ शुभारंभ हो गया है। सम्मेलन में देश के कोने-कोने से भाषा के जानकार पहुंच रहे हैं। तीन दिवसीय सम्मेलन में भाषा को संविधान की आठवीं सूची में शामिल करने के लिए पहल होगी। साथ ही भाषा के संरक्षण व संवर्द्धन पर चिंतन-मंथन होगा। मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक चंदन राम दास ने कहा कि भाषा और बोली उस क्षेत्र, राज्य तथा देश की पहचान होती है। कुमाउनी के संरक्षण के लिए हमें अपने घर से पहल करनी होगी। बच्चे शिक्षा किसी भी भाषा में लें, लेकिन उन्हें अपनी भाषा आनी चाहिए। यह सम्मेलन नई पीढ़ी को भाषा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा।

आज साहित्याकार, कलाकार तथा भाषा के जानकार कैलखुरिया मंदिर के पास एकत्र हुए। यहां से जुलूस की शक्ल में नरेंद्रा पैलेस के सभागार में पहुंचे। यहां दीप जलाकर अतिथियों ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। क्षेत्रीय विधायक चन्दन राम दास ने कहा कि अब नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं को आगे बढ़ाने की पहल हो रही है। क्षेत्रीय भाषाएं अब रोजगारपरक भी होंगी। इसके लिए सभी को मिलजुल कर प्रयास करना होगा।

विशिष्ट अतिथि पूर्व जिला जज जयदेव सिंह ने कहा कि भाषा से हमारी पहचान होती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई बोलते -बौलते ठैरा कहेगा तो वह कुमाऊं का होगा। यदि काख जाण बल कहेगा तो उत्तरकाशी, कख जाण छै तो चमोली या पौड़ी का होगा। भाषा हमारी पहचान है। इसे बचाए रखना सबके लिए जरूरी है।

अध्यक्षता करते हुए केश्वानंद चंदोला ने कहा कि आज बाहर जाने के बाद कई युवाओं को अपनी भाषा नहीं आने की कमी खल रही है। कुछ युवा इसके बाद अपनी भाषा सीख रहे हैं। आज सभी अभिभावकों की जिम्मेदारी है वह अपने आने वाली पीढ़ी को अपनी भाषा से जरूर रूबरू कराएं। यह सम्मेलन इस बात का गवाह भी बनेगा कि बागेश्वर से कुली उतार जैसे आंदोलन शुरू हुए जो राष्ट्रीय आंदोलन बने। यह बाबा बागनाथ जी की भूमि व उनके आशीर्वाद का कमाल है, इसी तरह कुमाऊनी भाषा के लिए जगी यह अलख दिल्ली तक जानी चाहिए। नरेंद्र खेतवाल ने सभी का स्वागत किया। साथ ही सभी से भाषा के प्रति संवेदनशील बने रहने की अपील की। पहरू पत्रिका के हयात सिंह रावत ने सम्मेलन के उद्देश्य के बारे में बताया।कार्यक्रम वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा की देखरेख में संचालित हुआ जो आगामी तीन दिनों तक अलग अलग चरणों में जारी रहेगा। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों, भाषा प्रेमियों व साहित्य प्रेमी लोगों ने बढ़चढ़ कर प्रतिभाग किया।

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