नरेगा: अफसर मौज करेगा,कर्मचारी भूखों मरेगा!

जगदंबा प्रसाद कोठारी  रूद्रप्रयाग जनपद के विकास भवन द्वारा मनमाने तरीके से नरेगा के बजट को “ठिकाने” लगाया जा रहा है। जनपद के तीनों विकासखंडों मे से उखीमठ ब्लाक को छोड़कर जखोली, अगस्तमुनी व जिला विकास कार्यालय मे नरेगा के नाम पर अधिकारी मौज ले रहे हैं। शासन द्वारा लगातार सख्ती बरते जाने के बावजूद […]

जगदंबा प्रसाद कोठारी
 रूद्रप्रयाग जनपद के विकास भवन द्वारा मनमाने तरीके से नरेगा के बजट को “ठिकाने” लगाया जा रहा है। जनपद के तीनों विकासखंडों मे से उखीमठ ब्लाक को छोड़कर जखोली, अगस्तमुनी व जिला विकास कार्यालय मे नरेगा के नाम पर अधिकारी मौज ले रहे हैं।
शासन द्वारा लगातार सख्ती बरते जाने के बावजूद यह अधिकारी बाज नही आ रहे हैं।
 अधिकारियों की मनमानी का आलम यह है कि जिले के अधिकारियों के अनुबन्धित किराए के वाहनों समेत मोबाइल फोन का भुगतान भी नरेगा के बजट से हो रहा है।
 ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अधिनियम 2005 के तहत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार के वयस्क सदस्य को वर्ष भर में 100 दिनों के रोजगार दिये जाने की गारंटी है।
अधिनियम के अंतर्गत किसी भी योजना मे 60 प्रतिशत श्रम व 40 प्रतिशत सामग्री मद पर व्यय किये जाने का प्रावधान है व नरेगा अंतर्गत आयेे कुल बजट का 1 प्रतिशत राशि विकास भवन प्रशासनिक खर्चों के लिए व्यय कर सकता है।
 जनपद मे आधा दर्जन से अधिक सरकारी वाहनों का भुगतान मनरेगा बजट से हो रहा है।
जिनमे प्रमुख तौर पर हैं-
1- मुख्य विकास अधिकारी के दो वाहन ( व्यय 60,000 मासिक अनुमानित)
2- खंड विकास अधिकारी अगस्तमुनी, एक वाहन (व्यय 30,000 मासिक)
3- खंड विकास अधिकारी जखोली, एक वाहन (व्यय 30,000 मासिक)
4- तहसीलदार जखोली, एक वाहन (व्यय 21,000 मासिक)
 हद तो तब हो गई जब इन अधिकारियों के मोबाइल फोन का हजारों रुपये का बिल भुगतान भी नरेगा के बजट से हो रहा है। जबकि 1जनवरी 2017 से मात्र 349 रुपये में कोई भी मोबाइल कम्पनी महीने भर तक देश भर मे निःशुल्क काल व इंटरनेट सेवा दे रही है। लेकिन सरकारी बजट पर धड़ल्ले से इन अधिकारियों के पोस्ट पेड मोबाइल बिलों का भुगतान हो रहा है।
 जिले के 88 मनरेगा कर्मचारियों के मानदेय को यह अधिकारी अपनी मनमौजी मे खर्च कर चुके हैं। जिस कारण पिछले आठ माह से इन कर्मियों को मानदेय नही मिला। मजबूरन 3 नवम्बर से जिले के मनरेगा कर्मियों को हड़ताल पर जाना पड़ा।
 13 नवम्बर को जिला अधिकारी के मौखिक आश्वासन पर मनरेगा कर्मियों ने अपनी हड़ताल स्थागित कर दी।
 जिला अधिकारी मंगेश घिल्डियाल कहते हैं कि जनपद के सभी मनरेगा कर्मचारियों को पिछला भुगतान अति शीघ्र कर दिया जाएगा और आगे से सभी अधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है कि पहले मनरेगा अंतर्गत कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान किया जाए और तब प्रशासनिक व्यय।वित्तीय अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
 मनरेगा के तहत संचालित तहसीलदार जखोली का यह वाहन पूर्व मे भी अपनी नम्बर प्लेट को लेकर सुर्खियों में रह चुका है।
तहसील प्रशासन की मनमानी के चलते किराए के व्यावसायिक वाहन को (जिसकी नम्बर प्लेट पीली होती है) पद की धौंस दिखाते हुए सफेद कर दी गयी (जो कि निजी वाहनों के लिए मान्य है)
तहसीलदार जखोली का मनरेगा तहत संचालित वाहन तब चर्चा में आया जब आगे की सफेद रंग की नम्बर प्लेट का रंग उतर गया और पीछे की नम्बर प्लेट सफेद रह गयी।
“पर्वत जन” मे खबर प्रकाशित होते ही तहसील प्रशासन ने इस किराए के वाहन की नम्बर प्लेट को तो सुधारा…
लेकिन “नरेगा” के बजट से!
अपर सचिव ग्राम्य विकास युगल किशोर पंत ने बताया कि अधिकारियों को तत्काल लंबित भुगतान जारी करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

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